आप कितना सोना खरीद और रख सकते हो ?

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एक व्यक्ति कितना सोना रख सकता है, क्या ऐसी कोई सीमा तय की गई है ?

भारत में पहले गोल्ड (Gold Price) कंट्रोल एक्ट, 1968 था जो नागरिकों को तय की गई मात्रा से अधिक सोना रखने से रोकता था. हालांकि, इसे जून 1990 में समाप्त कर दिया गया था।

अब भारत में सोना रखने की मात्रा पर कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन अधिक सोना रखने के लिए आयकर विभाग (income tax department) ने कुछ दिशा निर्देश दिए हैं।

भारतीय घरों में सोना खरीदने और रखने की परंपरा सदियों पुरानी है. लोग शादी-विवाह में बेटी और बहू को उपहार के रूप में सोना के गहनें देते है. सोना को इसलिए महिलाओं का स्त्री धन भी कहा जाता है।

महिलाएं अपने इस स्त्री धन को जल्दी बाहर निकालना भी नहीं चाहतीं, किसी को देना तो बहुत दूर की बात है. यह पीढ़ी दर पीढ़़ी से चला आ रहा है. मां और सास अपने गहनें अपनी बहू या बेटी को देती हैं और यह परंपरा आज भी बरकरार है. तीज त्योहार, शादी, विवाह, अक्षय, तृतीया पर सोना खरीदना हमारे देश में शुभ माना जाता है. सोना कोई अपने पैसे से खरीदता है तो किसी को उपहार के रूप में मिलता है।

दरअसल, इस बात की कोई सीमा नहीं है कि किसी के पास कितने सोने के आभूषण या गहने हो सकते हैं, लेकिन विवादों से बचने और एकरूपता रखने के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने 11-05-1994 को अपने अधिकारियों के लिए निर्देश जारी किया था।

जिसके अनुसार आयकर अधिकारी किसी भी विवाहित महिला के 500 ग्राम तक के सोने के गहने जब्त नहीं करेंगे. वहीं अविवाहित महिला के लिए यही सीमा 250 ग्राम है लेकिन पुरुष चाहें विवाहित हों या अविवाहित, उनके लिए 100 ग्राम की निचली सीमा तय की है. यानी इतना सोना रखने पर आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि आयकर अधिकारी आपका सोना जब्त नहीं कर सकते।

आपकी आय और समाजिक स्थिति इतनी अधिक सोने के आभूषण और गहने रखने की गारंटी न दे. इस बात का ध्यान रखें कि इस निर्देश में केवल परिवार के आभूषण ही शामिल हैं. इसलिए गैर-पारिवारिक सदस्यों से संबंधित आभूषण को जब्त किया जा सकता है और मात्रा के बावजूद ले जाया जा सकता है।

अधिक सोना रखने पर भी चिंता वाली बात नहीं है. वो गहने में भी अधिकारी ना ले जाएंगे ना ही जब्त करेंगे बशर्ते आपको इसके स्रोत का प्रमाण देना होगा. साधारण भाषा में कहें तो आपने वह सोना कहां से खरीदा या किसने विरासत उपहार के रूप में दिया इसका लेखा-जेखा, काजग-पतरी संभाल कर रखना होगा।

इसलिए सोना खरीदें तो उसका बिल आपने पास जरूर रखें. मान लीजिए तय की गई सीमा से अधिक जो गहने हैं अगर वो विरासत में मिलने का दावा किया गया है तो आपके पास कुछ ऐसे दस्तावेज होने चाहिए जो इस बात को साबित कर सकें. वह दस्तावेज एक वसीयत के रूप में हो सकता है. जो विधिवत रूप से संपत्ति कर रिटर्न या मृतक व्यक्ति के आयकर रिटर्न द्वारा समर्थित हो. इसी तरह उपहार में मिलने वाले आभूषण का भी कोई ठोस सबूत होना चाहिए।

यह जरूरी नहीं है कि आप डेबिट या क्रेडिट कार्ड से ही खरीदें, आप नकद भी खऱीद सकते हैं लेकिन सबूत के लिए निकासी का प्रमाण चाहिए कि ये गहनें टैक्स पेड पैसे से खरीदा गया।

इसलिए गहनों की खरीदारी, लेन-देन, आदान-प्रदान, पुराने गहनों को बदलकर नए गहनों लेने आदि की सभी रसीद सुरक्षित रखें.इस बात का ध्यान रखें कि ये नियम सिर्फ सोने के आभूषणों पर ही लागू होता है, न कि किसी अन्य रूप में सोने या हीरे के आभूषण, कीमती पत्थरों आदि जैसे अन्य प्रकृति आभूषणों पर।

इसलिए अधिकारी किसी भी सोने के सिक्के, सोने की छड़ और गैर-सोने के आभूषणों को जब्त कर सकते हैं. भले ही इनका वजन तय सीमा के भीतर हो, आप साक्ष्य देकर ही इन गहनों का बचा सकते हैं।

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