कारखाना अधिनियम 1948 के अनुसार प्रत्येक मजदूर को सुविधाएं पाने का हक।

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कारखाना अधिनियम सन 1948 के अनुसार प्रत्येक मजदूर को विधि द्वारा निर्धारित की गई सुविधाएं पाने का हक है, वह सुविधाएं निम्न प्रकार से है।

1 : जिस कारखाने में 500 से अधिक श्रमिक एक कार्य करते हैं वहां एक श्रम कल्याण अधिकारी की कारखाना मालिक द्वारा नियुक्त की जाएगी और वह उसका वेतन भी देगा|

2 : कारखाने में फर्स्ट एंड बॉक्स सोना चाहिए, 500 से अधिक श्रमिक होने पर डाक्टर व नर्सिंग स्टाफ के साथ उपचार कक्ष भी होना चाहिए।

3 : जिन कारखानों की क्षमता 250 श्रमिकों से अधिक है वहां जलपान गृह की सुविधा होनी चाहिए।

4 : कर्मचारी यदि 150 से अधिक है तो उनकी सुविधा के लिए विश्राम कक्ष, आराम कक्ष, व भोजनालय की स्थापना होनी चाहिए।

5 : जहां कर्मचारी खड़े रहकर कार्य करते हैं वहां कर्मचारियों के बैठने की उचित व्यवस्था होनी चाहिए।

6 : पुरुष तथा महिला कर्मचारियों के लिए अलग-अलग वस्त्र धोने की व्यवस्था होनी चाहिए गीले वस्त्रों को सुखाने की भी व्यवस्था कारखाना मालिक की ओर से की जानी चाहिए।

7 : कारखाना अधिनियम 1948 के अनुसार कारखानों में 30 से अधिक महिला कर्मचारी होने पर उनके 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए शिशु घर होने चाहिए, शिशु की देखरेख के लिए कुशल महिला होनी चाहिए।

8 : महिला श्रमिकों से 1 दिन में 9 घंटे से ज्यादा कार्य नहीं लिया जा सकता।

9 : शाम 7:00 बजे से सुबह 5:00 बजे तक महिला श्रमिकों कार्य पर नहीं लगाया जा सकता।

10 : 1 सप्ताह में 48 घंटों से ज्यादा कार्य नहीं करवाया जा सकता, सप्ताह में 6 दिन काम कि वह 1 दिन छुट्टी का होगा।

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