पूरा (PURA) मॉडल क्या है ?

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हमारे देश को सर्वश्रेस्ट और महान बनाने में बहुत सारे महान लोगो को अपना अहम योगदान दिया है जिनके बारे में पढ़कर या सुनकर हमे गर्व महसूस होता है।

हमारे भारत देश के प्रसिद्ध वैज्ञानिक और देश के ग्यारवें राष्ट्रपति डॉ.अब्दुल कलाम ने देश को ऊंचाइयों तक पहुंचने और देश को आगे बढ़ाने में बहुत सहयोग दिया है।

डॉ. अब्दुल कलाम ने देश के ग्रामीण क्षेत्रों में शहरो के जैसा सुविधा प्रदान करने और ग्रामीण क्षेत्रों का विकास करने के मकसद से एक विजन दिया, इसी विजन का नाम PURA रखा गया।

इस विजन का मुख्य उद्देश्य देश के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा देना है।

PURA यानी की “Provision of Urban Amenities to Rural Areas (प्रोविजन ऑफ अर्बन एमेनिटीज तो रूरल एरियाज)” को हिंदी में PURA को ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी सुविधाओं का प्रावधान कहते है।

PURA मुख्य उद्देश्य ग्रामीण इलाको को विकसित करना और उसमे शहरो की तरह सुविधाएं प्रदान करवाना है, जिससे ग्रामीण लोगो को शहरो की तरह सुविधाएं मुहैया कराई जा सके और ग्रामीण क्षेत्रों को शहरो की तरह विकसित किया जा सके।

PURA मॉडल क्या है ?

भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम ने जनवरी 2003 में ग्रामीण क्षेत्रों को विकसित करने के लिए पूरा (PURA) मॉडल का विजन दिया था।

डॉ. कलाम का विजन था कि ग्रामीण क्षेत्रों में शहरो के जैसा जरुरी सुविधाएं मुहैया कराई जा सके, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगो के जीवन के गुणवत्ता में सुधार होगा और गांव को छोड़कर शहर के तरफ जाने वाले लोगो की संख्या में भी कमी होगी।

डॉ. कलाम देश के ग्रामीण क्षेत्रों को शहर जैसा विकसित करना चाहते है यही सोचकर उन्होंने इस विजन को प्रस्तुत किया था। डॉ. कलाम के सोच से प्रभावित होकर अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने साल 2004 में पूरा (PURA) मॉडल को शुरू किया।

इस मॉडल के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में शहरो जैसी सुविधा जैसे सड़क का निर्माण करना,गांव में बिजली की व्यवस्था करना, जल का प्रबंध करना,संचार की सुविधा,रोजगार के अवसर, ग्रामीण बैंक की सुविधा आदि ग्रामीण स्तर पर जरुरी सुविधाएं मुहैया करना है।

केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के द्वारा लागू की गयी इस योजना के लिए एशियाई विकास बैंक ने आर्थिक सहायता प्रदान किया।

इस मॉडल के तहत देश के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए सात पायलट प्रोजेक्ट चलाया लगा इसके साथ ही और भी कई मंत्रालयों और निजी क्षेत्रों के साथ में मिलाया गया।

लेकिन यह योजना जमीनी स्तर पर सही ढंग से नहीं चल सकी और पूरी तरह नाकाम रही।

उसके बाद साल 2012 में केंद्रीय क्षेत्र योजना के रूप में सरकार ने दोबारा इस योजना को शुरू किया, लेकिन इस बार इस योजना को शहरी जनगणना के विकास पर ध्यान केंद्रित करते हुए शुरुआत किया गया।

साल 2014-15 में केंद्र सरकार ने PURA योजना के लिए किसी भी प्रकार की राशि आवंटन नहीं किया बल्कि इस योजना के स्थान पर रुर्बन मिशन नामक एक योजना की शुरुआत की।

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