बालश्रम अधिनियम 1986|बाल मजदूरी क्या हैं, बालको से श्रम कराने की क्या सज़ा है ?

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चाय की दुकान, रेस्टोरेंट्स में आपने कई बच्चे देखे होंगे जो चाय के गिलास पकड़ाते या झूठे बर्तन धोते होंगे। 

इनमें ज्यादातर बच्चे ऐसे होते हैं, जो अक्सर अपने परिवार की बुरी माली हालत देखकर बचपन में ही काम करने को मजबूर हो जाते हैं, हम लोग उन्हें छोटू कहकर बुलाते हैं।

काम की वजह से यह बच्चे अक्सर अपनी पढ़ाई से विरत रहते हैं और बहुत ही कम पैसे में 15-20 घंटे तक काम करते हैं।

बच्चें और उनके परिवार की स्थिति के कारण उन्हें काम पर भेजते है, ओर काम पर रखने वाला उन्हें काम पैसे में ज्यादा काम करने की वजह से कम पर रख लेता है।

हमारे देश में बाल श्रम पर कानून है, फिर भी चोरी छुपी कई लोग बच्चें को कम पर रखते हैं।

बाल श्रम क्या है ?

अगर व्यावसायिक उद्देश्य से किए जा रहे किसी कार्य के लिए 14 साल से कम उम्र के बच्चे को नियुक्त किया जाता है तो वह बाल श्रम कहलाता है।

इसे भारत में गैर कानूनी करार दिया गया है, भारत के संविधान में मूल अधिकारों के अनुच्छेद 24 के तहत भारत में बाल श्रम पर पाबंदी लगाई गई है।

सन् 2016 में कानून लाकर बालश्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम 1986 में संशोधन किया गया और बालश्रम (निषेध और विनियमन) संशोधन अधिनियम 2016 लागू किया गया।

भारत के संविधान में मूल अधिकारों के अनुच्छेद 24 के तहत भारत में बाल श्रम पर पाबंदी लगाई गई है।

बाल श्रम पर इस नए कानून को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मंजूरी दी, इसके तहत किसी भी काम के लिए 14 साल से कम उम्र के बच्चे को नियुक्त करना गैर कानूनी माना गया है।

बालको को श्रम कराने पर सजा क्या है ?

यदि कोई नियोक्ता 14 साल से कम उम्र के बच्चों को किसी कार्य पर लगाता है तो ऐसा करने पर उसे दो साल तक की कैद की सजा या जुर्माना या सजा और अधिकतम 50 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

यह कानून 14 से 18 साल तक की उम्र के किशोरों को खान के साथ ही अन्य ज्वलनशील पदार्थ या विस्फोटकों जैसे जोखिम वाले कार्यों में रोजगार पर लगाने पर भी दिए जाने का प्रावधान किया गया है।

हालांकि यह कानून फिल्मों, विज्ञापनों और टीवी उद्योग में बच्चों के काम करने पर लागू नहीं होता।

सुरक्षा, स्वास्थ्य संबंधी उल्लंघन पर प्रावधान

अगर 14 से 18 की उम्र वालों से काम लिया जाए, लेकिन इसके अगर काम की समय सीमा तय न हो और रजिस्टर मेंटेन न किया जाए, स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधी उल्लंघन किए जाएं तो एक माह तक की जेल और साथ ही 10 से लेकर 20 हजार रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।

अगर आरोपी ने इस कानून के तहत पहली बार अपराध किया है तो उस पर केवल जुर्माना लगाया जा सकता है।

दूसरी बाद अपराध में संलिप्त पाए जाने पर नियोक्ता को एक साल से लेकर तीन साल तक की कैद का प्रावधान किया गया है।

श्रम विभाग की टीम अक्सर दुकानों, प्रतिष्ठानों में छापे भी मारती हैं। अगर वहां बच्चे किसी भी तरह के काम में संलग्न पाए जाते हैं तो नियोक्ता के खिलाफ कानून, विधि सम्मत कार्रवाई की जाती है।

बाल श्रम से जुड़े कानून के दायरे कई स्थितियों को बाहर भी रखा गया है, मसलन स्कूल से बाद के समय में अगर कोई बच्चा अपने परिवार के व्यवसाय में परिजनों की मदद करता है, तो उसे इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है।

14 साल से कम उम्र के बच्चों को काम पर रखना गैर कानूनी है, हालांकि कुछ मामले में अपवाद भी हैं, मसलन पारिवारिक व्यवसायों में काम करने वाले बच्चे स्कूल से आने के बाद या गर्मियों की छुट्टियों में यहां काम कर सकते हैं, लेकिन यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि इससे बच्चों की पढ़ाई पर असर न पड़े, ऐसा न हो कि बच्चों को काम कराने की वजह से स्कूल ही न भेजा जाए या उन्हें पढ़ाई ही न करने दी जाए।

यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि पारिवारिक व्यवसाय इस कानून के तहत परिभाषित किसी खतरनाक प्रक्रिया या पदार्थ से न जुड़ा हो।

जैसे यह ऊर्जा, बिजली उत्पादन से जुड़े उद्योग, खान या विस्फोटक पदार्थ से जुड़े उद्योग न हों, इसी तरह फिल्मों में बाल कलाकार के रूप में वह काम कर सकते हैं या फिर खेल से जुड़ी गतिविधियों में भाग ले सकते हैं।

भारतीय संविधान में क्या है बच्चों से जुड़े प्रावधान

संविधान के अनुच्छेद 24 के तहत खतरनाक गतिविधियों में रोजगार के खिलाफ 14 से कम उम्र के बच्चों की सुरक्षा का प्रावधान किया गया है।

अनुच्छेद 23 में बाल तस्करी और मजबूर श्रम पर रोक लगाई गई है, अनुच्छेद 21 ए के तहत 6 से 14 साल की उम्र के बच्चों के लिए शिक्षा का अधिकार दिया गया है, जबकि अनुच्छेर 39 राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश देता है, कि बच्चों के साथ किसी भी तरह का कोई दुव्यर्वहार न हो।

अनुच्छेद 15 के तहत सरकार को कानून और नीति बनाने की शक्ति प्रदान की गई है, इन कानूनों के जरिए राज्य बच्चों के अधिकारों की रक्षा करते हैं।

बाल श्रम निषेध दिवस कब मनाया जाता है

12 जून के दिन विश्व बाल निषेध दिवस मनाया जाता है, इस दिन दुनिया भर में सरकारी और गैर सरकारी यानी कि निजी तौर पर ढेरों कार्यक्रम होते हैं, इनमें जागरूकता गोष्ठी, रैली, सेमिनार सभी कुछ शामिल होता है।

कई निजी संस्थाएं इस दिशा में काम कर रही हैं, वह श्रम विभाग, पुलिस और प्रशासन के साथ मिलकर जगह जगह से बाल मजदूरों को मुक्त कराने का उपक्रम करती हैं, यहां तक कि बचपन आंदोलन चलाने भारत के कैलाश सत्यार्थी को पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई के साथ संयुक्त रूप से नोबेल पुरस्कार भी मिल चुका है, इन तमाम बातों के बावजूद आज भी लाखों की तादाद में देश में बाल श्रमिक कार्य कर रहे हैं, उनकी सबसे ज्यादा संख्या असंगठित क्षेत्र और कृषि क्षेत्र में देखने को मिल रही है।

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