रिश्वत लेना या देना अपराध है| भ्रष्टाचार निवारण अिधिनयम, 1988।

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कोई भी सरकारी कर्मचारी या सरकार द्वारा स्थापित अन्य संस्था का कर्म चारी जैसे किसी सरकारी कंपनी का कर्मचारी सरकार या सरकार की स्वामित्व वाली या सरकार की सहायता प्राप्त किसी भी संस्था का कर्मचारी, या कोई राजनेता अगर लोकसेवा या लोककाम के लिए रिश्वत लेता है, तो यह दंडनीय अपराध है।

भ्रष्टाचार निवारक अधिनियम, 1988 के धारा 7,8 ,11 तथा 12।

भ्रष्टाचार निवारक अधिनियम, 1988 के धारा 7,8 ,11 तथा 12 के तहत जब कोई सरकारी कर्मचारी अपना सरकारी काम करने के लिए जनता से पैसे लेता है, तो वह रिश्वत लेने का अपराध करता है।

हर सरकारी कर्मचारी कुछ निश्चित कार्य करता है जिसे करना उसकी जिम्मेदारी है। परंतु वह कर्मचारी अपना काम करने के लिए यदि पैसे या कुछ अन्य चीजें अपने लिए लेता है या किसी और के लिए लेता है ,तो वह घूस लेने का अपराध करता है।

सरकारी कर्मचारी पक्षपात करने के लिए भी घूस ले सकता है। घूस देने वाले को घूस लेने वाले का सहयोगी समझा जाता है। घूस लेने के लिए किसी को प्रेरित करना या उकसाना भी अपराध है।

रिश्वत लेने पर दंड का प्रावधान

इस अपराध का दंड कम से कम 6 महीने से लेकर 5 साल तक का कारावास तथा जुर्माना हो सकता है।

कानून के मुताबिक अब तक रिश्वत लेना ही अपराध माना जाता था, लेकिन अब रिश्वत देना भी अपराध की श्रेणी में शामिल कर लिया गया है.

अपने फायदे या अप्रत्यक्ष रूप से काम को प्रभावित करने के लिए रिश्वत देने के आरोपी पर 3 से लेकर 7 साल तक जेल और जुर्माना लगाया जा सकेगा.

IPC section 171E|धारा 171ई

171ई के तहत घूसखोरी के लिए सजा, जो कोई रिश्वतखोरी का अपराध करेगा, उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास, जिसे एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माना , या दोनों से दंडित किया जाएगा।

अगर रिश्वत परितोषण में भोजन, पेय, मनोरंजन के रूप में लिया जाता है तो बशर्ते रिश्वतखोरी को केवल जुर्माने से दंडित किया जाएगा।

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