लिव इन रिलेशनशिप कानून (Live In Relationship Law)।

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बालिग लड़के और लड़की या समलैंगिक कपल्स अपनी मर्जी से शादी किए बगैर एक साथ रह सकते हैं, इस तरह के रिश्ते को लिव इन रिलेशनशिप कहा जाता है।

मेट्रो सिटी के कपल्स और कई सेलेब्स भी अपनी पार्टनर के साथ लिव इन में रहते हैं।

देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, दो बालिग (लड़का व लड़की) अगर शादी किए बगैर भी अपनी मर्जी से पारिवारिक-वैवाहिक जीवन जी सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि विधायिका भी लिव इन रिलेशनशिप को वैध मानती है, सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में लिव इन रिलेशनशिप को लेकर एक गाइडलाइंस जारी किया था।

इसके मुताबिक जो रिश्ता पर्याप्त समय (लंबे समय) से चल रहा है, इतना होना चाहिए कि वह टिकाऊ माना जा सके, ये कोर्ट तय करेगा।

अगर दोनों पार्टनर लंबे समय से अपने आर्थिक व अन्य प्रकार के संसाधन आपस में बांट रहे हों तो ये भी रिश्ता लिव इन ही कहलाएगा।

आज लिव इन रिलेशनशिप में रहना बड़े शहरों में आम हो चुका है इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने इसे कानून वैध करार दिया है. चूंकि लिव इन को लेकर भारतीय संसद ने कोई कानून पारित नहीं किया है इसलिए सुप्रीम कोर्ट का आदेश ही इस मामले में कानून की तरह काम करता है और सुप्रीम कोर्ट लिव इन को पूरी तरह वैध मानता है।

लिव इन रिलेशन कब होगा वैध।

घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 की धारा 2( f ) के अंतर्गत लिव इन कोर परिभाषित किया गया है और इसे कानूनी मान्यता दी गयी है।

• लिव इन रिलेशन के लिए एक कपल का साथ रहना जरूरी है कि उन्हें पति-पत्नी की तरह एक साथ रहना होगा. हालांकि इसके लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है, लेकिन उनका लगातार साथ रहना जरूरी है. ऐसे संबंध को लिव नहीं माना जायेगा जिसमें कभी कोई साथ रहे हों और फिर अलग हो जायें, फिर कुछ दिन साथ रह लें।

• लिव इन कपल का एक ही घर में पति-पत्नी की भांति रहना अनिवार्य होगा।

• उन्हें एक ही घर के सामानों का उपयोग संयुक्त रूप से करना होगा।

• लिव इन साथी को पति-पत्नी की भांति घर के कामों में एक दूसरे की सहायता करनी होगी।

• लिव इन में रह रहे कपल के लिए यह जरूरी होगा कि अगर उनके बच्चे हों तो उन्हें भरपूर प्रेम और स्नेह दें तथा उनकी उचित परवरिश करें।

• लिव इन में रह रहे कपल के लिए यह जरूरी होगा कि अगर उनके बच्चे हों तो उन्हें भरपूर प्रेम और स्नेह दें तथा उनकी उचित परवरिश करें।

• समाज को इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि कपल लिव इन रिलेशन में रह रहे हैं, क्योंकि वैध संबंध है इसलिए इसकी जानकारी दी जानी चाहिए।

• लिव इन रिलेशन में रहने वालों का वयस्क होना बहुत जरूरी है, अगर कपल वयस्क नहीं हुआ तो संबंध वैध नहीं माना जायेगा।

• लिव इन रिलेशन की सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि दोनों व्यक्ति का पहले से कोई पति या पत्नी नहीं होना चाहिए. अगर कोई व्यक्ति पूर्व में पति या पत्नी के रहते हुए किसी और के साथ लिव इन रिलेशन बनाता है तो वह अवैध माना जायेगा।

रिश्ता खत्म होने पर कोर्ट में फैसला हो सकता हे।

जिस तरह से तलाक लेने पर कोर्ट के फैसले के अनुसार लड़की को चीजें देनी होती है। वैसे ही अगर कोई भी पुरुष लिव इन रिलेशन में रह रहा है तो वो पति की तरह सारी जिम्मेदारी उठाता है, अगर लिव इन रिश्ता तोड़ते हैं तो भी कोर्ट के फैसले के आधार पर जुर्माना लग सकता है, लिव इन रिलेशनशिप में रहने से पहले खुद को आर्थिक और मानसिक तौर पर सक्षम बना लें।

लिव इन में रह रही महिला को अपने साथी पुरुष से भरण पोषण की मांग करने का अधिकार है. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह कहकर महिला को भरणा पोषण के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है कि उन्होंने कानूनी शादी नहीं की है।

लिव इन से उत्पन्न संतान को माता-पिता की संपत्ति में अधिकार मिलता हैं ?

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि लिव इन में रहने के दौरान अगर कोई संतान उत्पन्न होती है तो उसे अपने माता-पिता की संपत्ति में पूरा अधिकार होगा और इससे कोई भी भी लिव इन कपल बच नहीं सकता है।

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