वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, अनुच्छेद 19(1)(क) & 19(2)।

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The Right To Freedom of Speech And Expression

अनुच्छेद 19(1)(क) में वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रावधान है और अनुच्छेद 19(2) में उसके उपर लगे प्रतिबंधो की यादी है।

वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रजातान्त्रिक शासन-व्यवस्था की आधारशिला है।

प्रत्येक प्रजातान्त्रिक सरकार इस स्वतंत्रता को बड़ा महत्व देती है।

वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता क्या है ?

शब्दों, लेखों, मुद्रणों (printing), चिन्ह्रों या किसी अन्य प्रकार से अपने विचारों को व्यक्त करना।

अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता में किसी व्यक्ति के विचारों को किसी ऐसे माध्यम से अभिव्यक्त करना सम्मिलित है जिससे वह दूसरों तक उन्हें संप्रेषित कर सके।

अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता क्यों जरुरी है ?

इण्डियन एक्सप्रेस न्यूजपेपर्स बनाम भारत संघ के मामले में उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि ‘अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता’ चार विशेष उद्देश्यों की पूर्ति करती है।

1 : यह व्यक्ति की आत्मोन्नति में सहायक होती है।

2 : यह सत्य की खोज में सहायक होती है।

3 : यह व्यक्ति के निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करती है।

4 : यह स्थिरता (Stability) और सामाजिक परिवर्तन में युक्तियुक्त सामंजस्य स्थापित करने में सहायक होती है।

व्युत्पन्न अधिकार (Derivative Rights) क्या है ?

वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मे सम्मिलित अधिकार

1 : बोलने की स्वतंत्रता

2 : अपने विचार को प्रस्तुत एवं प्रसारित करने का अधिकार

3 : प्रेस की स्वतन्त्रता (विचारों, भाषणों को छापने की स्वतंत्रता)

4 : जानने का अधिकार, सूचना का अधिकार (RTI Act 2005)

5 : राष्ट्रीय ध्वज फहराने का अधिकार (भारत संध बनाम नवीन जिंदल)

6 : अभिव्यक्ति पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता हो, तो विदेश भ्रमण मूल अधिकार है, लेकिन परोक्ष प्रभाव में नही

7 : खुद के प्रचार के लिए व्यापारिक विज्ञापन देने का अधिकार

8 : शिक्षण का माध्यम चयन करने का अधिकार

9 : मौन रहने की स्वतंत्रता

बन्ध, प्रदर्शन या धरना, और हड़ताल के अधिकार

बन्द का आह्वान एवं आयोजन असंवैधानिक

बन्द का आयोजन करना असंवैधानिक(Unconstitutional) और अवैध(Illegal) है।

उच्च न्यायालय के अनुसार ‘बन्द’ से नागरिकों के मूल अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और वे उनके प्रयोग करने से वंचित हो जाते हैं जबकि हड़ताल का ऐसा प्रभाव नहीं पड़ता है।

केरल उच्च न्यायालय ने यह अभिनिर्धारित किया कि बन्द के आह्वान में नागरिकों को अभिव्यक्त या विवक्षित रूप से यह धमकी दी जाती है कि वे अपनी सभी कार्यकलापों, और पेशों को रोक दें और घर से बाहर न जाएं अन्यथा उसका परिणाम भयानक होगा।

यदि शारीरिक हिंसा न भी हो तो भी नागरिकों में मनोवैज्ञानिक भय व्याप्त हो जाता है जिसके कारण वे अपने मूल अधिकारों का प्रयोग करने से वंचित हो जाते हैं।

जब किसी नागरिक को बलपूर्वक काम पर जाने या अपने कारोबार या पेशे को करने से रोका जाता है तो उसके मूल अधिकारों का उल्लंघन होता है।

बन्द का आह्वाहन करना, उसमे भाग लेना, सभी गैर क़ानूनी है और देश के विकास में अवरोध पैदा करती है।

हड़ताल का अधिकार

हड़ताल करने का अधिकार अनुच्छेद 19(1) (क) के अन्तर्गत कोई मूल अधिकार नहीं है, अत: एव किसी भी व्यक्ति को हड़ताल करने से रोका जा सकता है।

प्रदर्शन जब हड़ताल का रूप धारण कर लेता है तो वह विचारों की अभिव्यक्ति नहीं रहता है क्योकि हड़ताल में भी सामान्य नागरिक और देश को नुकशान जेलना पड़ता है।

जैसे:- बस ड्राईवर की हड़ताल, डॉक्टर की हड़ताल, बैंक कर्मचारी की हड़ताल।

प्रदर्शन करना या धरना

प्रदर्शन करना या धरना देना (Demonstration or picketing) भी मनुष्य की अभिव्यक्ति में समाविष्ट हैं।

लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता उसी प्रदर्शन और धरने को मिलेगी जो अहिंसक है और बिन उपद्रवी होंगे, जैसे ही प्रदर्शन हिंसक होते है उसकी स्वतंत्रता का अधिकार चला जाता है, और हिंसक प्रदर्शनकारी पर पुलिस दमन नीति अपना सकती है।

जैसे:- जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध प्रदर्शन, बलत्कार के अपराधी को सजा देनी की मांग के लिए प्रदर्शन, सरकार की नीति के खिलाफ धरना।

प्रतिबंध के आधार अनुच्छेद 19(2)

आधार पर नागरिकों की वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता पर प्रतिबन्ध लगाये जा सकते हैं ?

1 : राज्य की सुरक्षा

2 : विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण सम्बन्धों के हित में

3 : लोक व्यवस्था

4 : शिष्टाचार या सदाचार के हित में (Decency or morality)

5 : न्यायालय-अवमान (Contempt of Court)

6 : मानहानि और अपराध उद्दीपन के मामले में

7 : भारत की सम्प्रभुता एवं अखण्डता

अनुच्छेद 19(1) क, और अनुच्छेद 19(2)

अनुच्छेद 19(1) क

स्वतंत्रता(Freedom) : वाणी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता

अनुच्छेद 19(2)

प्रतिबन्ध(Restrictions) : राज्य की सुरक्षा, विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण सम्बन्धों के हित में, लोक व्यवस्था, शिष्टाचार या सदाचार के हित में, न्यायालय-अवमान, मानहानि, अपराध उद्दीपन के मामले मे, भारत की सम्प्रभुता एवं अखण्डता।

अनुच्छेद 19(1) ख, और अनुच्छेद 19(3)

अनुच्छेद 19(1) ख

स्वतंत्रता : सभा एवं सम्मलेन की स्वतंत्रता

अनुच्छेद 19(3)

प्रतिबन्ध(Restrictions) : सभा शांतिपूर्ण होनी चाहिए, सभा बिना हथियार के होनी चाहिए, भारत की प्रभुता और अखंडता या लोक व्यवस्था के हितों में युक्तियुक्त निर्बन्धन।

अनुच्छेद 19(1) ग, और अनुच्छेद 19(4)

अनुच्छेद 19(1) ग

स्वतंत्रता : संघ की स्वतंत्रता

अनुच्छेद 19(4)

प्रतिबन्ध(Restrictions) : लोक व्यवस्था, सदाचार (नैतिकता), देश की प्रभुता और अखंडता के हित में।

अनुच्छेद 19(1) घ, और अनुच्छेद 19(5)

अनुच्छेद 19(1) घ

स्वतंत्रता : संचरण की स्वतंत्रता

अनुच्छेद 19(5)

प्रतिबन्ध(Restrictions) : साधारण जनता के हित में, किसी अनुसूचित जनजाति के हित के संरक्षण के लिए।

अनुच्छेद 19(1) ड, और अनुच्छेद 19(5)

अनुच्छेद 19(1) ड

स्वतंत्रता : निवास की स्वतंत्रता

अनुच्छेद 19(5)

प्रतिबन्ध(Restrictions) : साधारण जनता के हित में, किसी अनुसूचित जनजाति के हित के संरक्षण के लिए।

अनुच्छेद 19(1) छ, और अनुच्छेद 19(6)

अनुच्छेद 19(1) छ

स्वतंत्रता : वृति, उपजीविका, व्यापार एवं कारबार की स्वतंत्रता

अनुच्छेद 19(6)

प्रतिबन्ध(Restrictions) : साधारण जनता के हित में, किसी वृति या व्यापार के लिए आवश्यक व्यवसायिक या तकनीकी लायकात राज्य निर्धारित करके, नागरिकों को पूर्णत: या भागत: किसी व्यापार या कारबार से बहिष्कृत करने की शक्ति प्रदान करके।

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