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भारतीय ध्वज संहिता, 2002|ध्वज फहराने के नियम

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भारतीय ध्वज संहिता भारतीय ध्वज को फहराने व प्रयोग करने के बारे में दिये गए निर्देश हैं।

जब भी ध्वज फहराया जाए तो उसे सम्मानपूर्ण स्थान दिया जाए। उसे ऐसी जगह लगाया जाए, जहाँ से वह स्पष्ट रूप से दिखाई दे।

जब राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है तो भगवा रंग की पट्टी सबसे ऊपर होनी चाहिए।

सरकारी भवन पर ध्वज रविवार और अन्य छुट्‍टियों के दिनों में भी सूर्योदय से सूर्यास्त तक फहराया जाता है, विशेष अवसरों पर इसे रात को भी फहराया जा सकता है।

ध्वज को सदा स्फूर्ति से फहराया जाए और धीरे-धीरे आदर के साथ उतारा जाए। फहराते और उतारते समय बिगुल बजाया जाता है तो इस बात का ध्यान रखा जाए कि ध्वज को बिगुल की आवाज के साथ ही फहराया और उतारा जाए।

अगर किसी सभा मंच पर ध्वज कार्यक्रम किया जाता है तो वक्ता का मुँह श्रोताओं की ओर हो तो ध्वज उनके दाहिने ओर होना चाहिए।

ध्वज किसी अधिकारी की गाड़ी पर लगाया जाए तो उसे सामने की ओर बीचोंबीच या कार के दाईं ओर लगाया जाए।

फटा या मैला ध्वज नहीं फहराया जाता है, जब ध्वज फट जाए या मैला हो जाए तो उसे अकेले पूरा नष्ट किया जाना चाहिए।

ध्वज केवल राष्ट्रीय शोक के अवसर पर ही आधा झुका रहता है, ध्वज पर कुछ भी लिखा नहीं होना चाहिए।

किसी दूसरे ध्वज या पताका को राष्ट्रीय ध्वज से ऊँचा या ऊपर नहीं लगाया जाएगा, न ही बराबर में या दाईं ओर नहीं रखा जाना चाहिए।

अन्य सभी ध्वज राष्ट्रीय ध्वज के बाईं ओर स्थित होने चाहिए यदि वे एक पंक्ति में लटकाए गए हैं।

झंडा हाथ से काते और बुने गए ऊनी, सूती, सिल्क या खादी से बना होना चाहिए। झंडे का आकार आयताकार होना चाहिए, इसकी लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2 का होना चाहिए।

तिरंगे को कैसे फोल्ड करें ?

तिरंगे को फोल्ड करते वक्त उसे पट या क्षैतिज अवस्था में रखें, इसके बाद इसे इस तरह फोल्ड करें कि केसरिया और हरे पट्टी के बीच सफेद पट्टी हो, ये भी ध्यान रखें कि सफेद पट्टी पर अशोक चक्र दिखाई दे, इसके बाद झंडे को दोनों हथेलियों पर रखते हुए सुरक्षित स्थान पर रखें।

तिरंगे को रात में नहीं फहराया जाता फिर हर घर तिरंगा अभियान में तिरंगे रात में क्यों फहराया गया ?

इंडियन फ्लैग कोड 2002 के अनुसार नेशनल फ्लैग तिरंगा को केवल दिन में ही फहराने की अनुमति थी, शाम होने के साथ ही इसे उतार लिया जाता था।

लेकीन मोदी सरकार ने हर घर तिरंगा अभियान के लिए फ्लैग कोड के नियमों में बदलाव किया है, जिसके मुताबिक अब दिन और रात दोनों में तिरंगा झंडा फहराया जा सकता है।

इसके लिए 20 जुलाई, 2022 को भारतीय झंडा संहिता 2002 में संशोधन किया गया है।

हर घर तिरंगा अभियान में पॉलिस्टर के झंडो को भी मिली मंजूरी

फ्लैग कोड में एक और बड़ा बदलाव करते हुए सरकार ने पॉलिस्टर और मशीन के झंडों को भी मंजूरी दे दी है, इसके पहले केवल हाथ से बनाए गए कपास, ऊन और रेशमी खादी के झंडों को फहराने की अनुमति थी।

राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 में धारा 3

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Section 3 in The Prevention of Insults to National Honour Act, 1971।

भारतीय राष्ट्रगान आदि के गायन की रोकथाम-जो कोई भी जानबूझकर भारतीय राष्ट्रगान के गायन को रोकता है या ऐसे गायन में लगी किसी सभा को बाधित करता है, उसे कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकती है, या जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है।

राष्ट्रगान बजने के दौरान बैठने और खड़े होने पर कानून चुप है, यह अधिनियम किसी ऐसे व्यक्ति के लिए दंड निर्धारित करने तक सीमित है, जो अन्य रूपों को राष्ट्रगान गाने से रोकता है, या जो लोग एंथम गा रहे हैं, उन्हें परेशान करते हैं।

5 जनवरी, 2015 को भारत सरकार के आदेश के सामान्य प्रावधान में कहा गया है, जब भी राष्ट्रगान गाया और बजाया जाता है, तो दर्शक ध्यान में खड़े होंगे।

फटे और पुराने झंडों का क्या करें ?

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तिरंगे का सम्मान जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है फटे-पुराने तिरंगे का निस्तारण करना, ऐसा नहीं होगा तो झंडा लोगों के पैरों के नीचे आ सकता है, जो तिरंगे का अपमान है, जो तिरंगा सही सलामत है, उसका सम्मान और जो फट गया है, उसका निस्तारण करना हमारा कर्तव्य है, किसी भी झंडे को फटी-पुरानी स्थिति में नहीं छोड़ना चाहिए, बल्कि उसका सम्मान पूर्वक निस्तारण करना चाहिए।

हम यह देखते हैं कि सड़कों पर कुछ फटे तो कुछ सही सलामत झंडे गिरे रहते हैं, लेकिन कोई भी उन्हें नहीं उठाता, कई बार हमरे देश का प्रतीक यह तिरंगा पैर की नीचे कुचला जाता है, अधिकतर लोग इन झंड़ों को उठाने में हिचकते हैं।

सब लोग ये अच्छे से जानते हैं कि राष्ट्रध्वज (तिंरगा) कैसे लहराया जाता है, लेकिन झंडा फहरा देने के बाद कई लोग यह नहीं जानते की फटे पुराने झंडे का नीस्तारण कैसे किया जाए।

फ्लैग कोड ऑफ इंडिया 2002

पार्ट-2, सेक्शन 1- 2.2 (xiii): अगर झंडा फटी-पुरानी अवस्था में है, तो किसी निजी जगह पर इसका निस्तारण कर देना चाहिए। निस्तारण के लिए तिरंगे की मर्यादा का ध्यान रखते हुए दफनाने या फिर किसी और तरीके को अपनाया जा सकता है।

फट गए झंडे के निस्तारण का सबसे सही तरीका है उसे जलाना, झंडे को दफनाया भी जा सकता है, लेकिन अक्सर दफनाने में जब कभी खुदाई के बाद मिट्टी उपर आती है, तो फिर झंडा ऊपर आ सकता है और फिर लोगों के पैरों में कुचला जा सकता है।

फटे-पुराने झंडे को जलाते वक्त इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वह पूरा जल जाए, न कि आधा जले और कुछ हिस्सा बच जाए, साथ ही यह भी ध्यान रखना चाहिए कि आप किसी निजी स्थान पर ही झंडे को जला रहे हों।

ध्वज संहिता की धारा पांच के उपबंध 3(25) में ध्वज को पूरी तरह जलाने या ध्वज के गौरव व गरिमा के अनुसार समूचत उपाय से पूरी तरह नष्ट या निपटान करने की बात कही गई है. इसके मुताबिक एकांत में जहां कोई और ना देखे वहां पवित्र भूमि पर पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ जीर्ण ध्वज को लकड़ी के बक्से में रखकर गाड़ देना चाहिए।

ध्वज को कायदे से तह करना चाहिए, उसका सही तरीका है कि केसरिया पर हरे रंग की पट्टी की तह ऐसे बनाई जाए कि सफेद रंग पर बना चक्र सबसे ऊपर दिखाई दे. जलाने का भी विकल्प नागरिकों के पास है. वो एकांत में जीर्ण ध्वज को पूरे सम्मान के साथ पूरी तरह जला दें. उसकी राख को या तो जमीन में दबा दें या किसी पवित्र नदी की धारा में बहा दे।

ऐसे तो झंडे को आग लगाना तिरंगे का अपमान है, लेकिन फटे-पुराने झंडे को जलाकर उसे सैल्यूट करना तिरंगे की मर्यादा का ध्यान रखते हुए उसका उचित निस्तारण करना है।

तिरंगे को जलाने के बाद दो मिनिट का मौन रखना ज़रूरी है।

फटा पुराना तिरंगा फहराना चाहिए ?

तिरंगा फहराने के भी अपने नियम और कायदे हैं. जैसे देश के प्रतीकों के सम्मान की रक्षा के लिए कानून हैं ठीक वैसे ही राष्ट्रध्वज के लिए संहिता है, अगर इसका पालन नहीं किया जाए तो यह तिरेंगे का अपमान माना जाता है, और इसके लिए सजा का प्रावधान है, उसमें बताया गया है कि तिरंगा अगर सही स्थिती में न हो तो उसे नहीं फहराना चाहिए।

ध्वज संहिता के भाग दो की धारा दो के अनुच्छेद दो के उपबंध 22(ii) के बताया गया है कि क्षतिग्रस्त, कटे फटे या फिर उड़े रंगों वाला अस्त व्यस्त ध्वज नहीं फहराना चाहिए. संहिता में आगे 22 (xiii) के मुताबिक जब राष्ट्रध्वज का कलेवर जीर्ण हो जाए यानी क्षतिग्रस्त हो या बदरंग हो जाए या फिर कट फट जाए तो उसे एकांत में पूर्ण सम्मान के साथ जलाकर या दफना कर पूरी तरह से नष्ट कर दिया जाए ताकि राष्ट्र ध्वज की गरिमा और महिमा बनी रहे।

तिरंगे के अपमान पर सजा का प्रावधान

ध्वज संहिता के अनुसार ही तिरंगे को फहराना चाहिए या नष्ट करना चाहिए. ध्वज संहिता के धारा दो में कहा गया है कि कोई व्यक्ति सार्वजनिक जगह या ऐसी जगह जहां किसी की नजर पड़ती हो वहां राष्ट्रध्वज को अपमानित करना, यानी तिरंगे या उसके किसी हिस्से को फाड़ना, जलाना, कुचलना, दूषित या विकृत करना या विरूपित करना दंडनीय अपराध है।

इसके लिए 3 साल की जेल और अदालत की ओर से तय आर्थिक जुर्माने या फिर दोनों से दंडित किया जा सकता है।

रिटायरमेंट के बाद पूर्व राष्ट्रपति को आजीवन मिलती हैं ये सुविधाएं

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राष्ट्रपति भारत के प्रथम नागरिक होते हैं। इसके अलावा वह तीनों सेनाओं के कमांडर-इन-चीफ भी होते हैं। भारत में राष्ट्रपति का चुनाव निर्वाचक मंडल के सदस्यों द्वारा किया जाता है, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं।

तीनों सेनाओं के सर्वोच्च सेनापति के पद से रिटायर होने के बाद राष्ट्रपति (President) को कई तरह की सुविधाएं मिलती हैं।

रिटायर होने के बाद राष्ट्रपति को कई तरह के भत्ते और सुविधाएं मिलती हैं, इसके साथ ही पूर्व राष्ट्रपति एक मोटी पेंशन के भी हकदार होते हैं।

पूर्व राष्ट्रपति को क्या-क्या सुविधाएं मिलती है ?

राष्ट्रपति के पद से रिटायर होने के बाद पूर्व राष्ट्रपति को 1.5 लाख रुपये प्रतिमाह की पेंशन है।

राष्ट्रपति के अनुमोदन अधिनियम के अनुसार, पूर्व राष्ट्रपति के पास सचिवीय कर्मचारियों और कार्यालयों के लिए 60,000 रुपये तक खर्च करने का प्रावधान है।

पत्नी को प्रति महीने सेक्रेटेरियल सहायता के रूप में 30 हजार रुपये की राशि दी जाती है।

पूर्व राष्ट्रपति को कम से कम 8 कमरों वाला बंगला दिया जाता है।

पूर्व राष्ट्रपति को 2 लैंडलाइन, एक मोबाइल फोन और इंटरनेट कनेक्शन, मुफ्त बिजली और पानी की सुविधा दी जाती है।

पूर्व राष्ट्रपति को पांच लोगों का निजी स्टाफ भी मिलता है, साथ में गाड़ी और ड्राइवर भी दिए जाते हैं।

मुफ्त मेडिकल की सुविधा भी दी जाती है,

पूर्व राष्ट्रपति (Former President) को एक व्यक्ति के साथ प्रथम श्रेणी में मुफ्त ट्रेन और हवाई यात्रा की सुविधा मिलती है।

पूर्व राष्ट्रपति को दिल्ली पुलिस की सुरक्षा और 2 सचिव भी दिए जाते हैं।

नारी शक्ति पुरस्कार के लिए आवेदन पत्र/नामांकन कैसे करें ?

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महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने नारी शक्ति पुरस्कार-2022 के लिए आवेदन पत्र/नामांकन आमंत्रित किए।

यह पुरस्कार महिला सशक्तिकरण, विशेष रूप से कमजोर और हाशिए पर रहने वाली महिलाओं की भलाई के लिए काम करने वाले व्यक्तियों को सम्मानित करने के लिए दिए जाएंगे।

देश की महिलाओ को आत्म निर्भर एवं सशक्त बनाने के लिए इस नारी शक्ति पुरस्कार का शुभारम्भ किया है, जिसके माध्यम से औरतो की उपलब्धि को पहचान प्रदान करके उन्हे सरकार द्वारा आर्थिक सहायता प्रदान कर प्रोत्साहन दिया जाएगा।

नारी शक्ति पुरस्कार के तहत सभी पात्र औरतो को 200000 रुपए की धनराशि सहायता के रूप में दी जाएगी एवं एक सर्टिफिकेट भी प्रदान किया जाएगा।

प्रतिवर्ष 8 मार्च को महिला दिवस पर लगभग 15 महिलाओ को इस योजना का लाभ देने के लिए नारी शक्ति पुरस्कार प्रदान किया जाता है, इसमें प्रदान की जाने वाली धनराशि राष्ट्रपति जी द्वारा प्रदान की जाती है।

जो भी महिला इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन करना चाहती है, वह ऑनलाइन आवेदन करके इसका लाभ ले सकती है।

भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने नारी शक्ति पुरस्कार-2022 के लिए आवेदन पत्र/नामांकन आमंत्रित किए हैं। नारी शक्ति पुरस्कार, 2022 के लिए आवेदन पत्र/नामांकन केवल निर्दिष्ट वेबसाइट यानी www.awards.gov.in के माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे।

31 अक्टूबर, 2022 तक प्राप्त सभी आवेदन पत्रों/नामांकनों पर वर्ष 2022 के लिए नारी शक्ति पुरस्कार के लिए विचार किया जाएगा।

नारी शक्ति पुरस्कार-2022 महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर यानी 8 मार्च, 2023 को महिला सशक्तिकरण, विशेष रूप से कमजोर और हाशिए पर रहने वाली महिलाओं के लिए काम करने वाले व्यक्तियों को सम्मानित करने के लिए प्रदान किए जाएंगे।

नारी शक्ति पुरस्कार के लिए कहा आवेदन करें।

पात्रता मानदंड और अन्य विवरण के लिए, नारी शक्ति पुरस्कार के लिए दिशानिर्देश महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की वेबसाइट https://wcd.nic.in/acts/guidelines-nari-shakti-puraskar-2022-onwards पर और आवेदन पत्र/नामांकन पोर्टल www.awards.gov.in पर उपलब्ध हैं।

नारी शक्ति पुरस्कार के लिए फॉर्म भरने की आखरी तारीख कब है।

ऑनलाइन आवेदन पत्र/नामांकन 31 अक्टूबर, 2022 तक भेजे जा सकते हैं।

Nari Shakti Puraskar 2022 की चयन प्रक्रिया

केंद्र सरकार द्वारा आरम्भ की गयी इस योजना के अंतर्गत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की देख- रेख में एक समिति का गठन किया जायेगा, जिसके माध्यम से नामांकन की जाँच एवं संक्षिप्त सूची की स्क्रीनिंग की जाएगी।

इस योजना के तहत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा एक चयन समिति का भी गठन किया जायेगा जो स्क्रीनिंग कमेटी की सिफारिश के आधार पर पुरस्कार विजेताओं का चयन करेगी।

इस योजना के अंतर्गत चयन समिति केवल ऐसी महिलायें, संस्थानों या संगठनों पर विचार करेगी जिनका नामांकन और सिफारिश अंतिम तिथि से पहले की गयी हो।

नारी शक्ति पुरस्कार के लाभ तथा विशेषताएं

सभी पात्र उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग और उनका चयन 20 फरवरी तक किया जाएगा तथा उन्हें पुरस्कार के रूप में प्रमाण पत्र एवं 2 लाख रूपये की धनराशि प्रदान की जाएगी।

इस राष्ट्रीय पुरस्कार के नामांकन के लिए राज्य सरकार, केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन, सम्बंधित केन्द्रीय मंत्रालयों या विभागों, गैर–सरकारी संगठनों जैसेकि एनजीओ, विश्वविद्यालयों या संस्थानों एवं पीएसयू आदि को भी आमंत्रण दिया जाता हैं।

राज्य में बाल लिंग अनुपात (सीएसआर) में सुधार करने वाले राज्य या केंद्र शासित प्रदेशों को भी यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।

योग्य व्यक्तियों के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण के लिए काम करने वाली संस्थाओं को दिया जाता है।

हर साल लगभग 15 महिलाओं को इस नारी शक्ति पुरस्कार के अंतर्गत पुरस्कार प्रदान किया जाता है, जिसकी मदद से वह सशक्त एवं आत्मनिर्भर बन पाए ।

सभी पात्र औरतो के नाम की घोषणा 20 फ़रवरी को कर दी जाती है पर उनका सम्मान एवं उन्हे पुरस्कार 8 मार्च महिला दिवस के मौके पर प्रदान किया जाता है।

Nari Shakti Puraskar Scheme के अंतर्गत पात्रता

इस योजना के अंतर्गत देश की लगभग सभी महिलाएं एवं संस्थाएं आवेदन कर सकती है।

सरकार द्वारा निर्मित इस नारी शक्ति पुरस्कार में आवेदन करने के लिए वक्तिगत श्रेणी के अंतर्गत कम से कम आयु 25 वर्ष नियत की गई है।

एक संस्था के लिए यह पात्रता है कि वह संबंधित क्षेत्र में कम से कम 5 वर्षों तक कार्यरत होनी चाहिए।

अगर किसी को पहले से यह पुरस्कार मिल चूका है तो वह इसके लिए पुनः आवेदन नहीं कर सकता।

बाल लिंगानुपात में सुधार लाने वाले राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश भी इसके अंतर्गत आवेदन कर सकते है।

जिन महिलाओ ने आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण कार्यो में अपना योगदान दिया है वह इस Nari Shakti Puraskar 2022 के तहत पात्र मानी जाएगी।

नारी शक्ति पुरस्कार के लिए आवेदन पत्र के लिए आवश्यक दस्तावेज

• आवेदक का आधार कार्ड

• स्थाई निवास प्रमाण पत्र

• आय और आयु का प्रमाण पत्र

• पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ और मोबाइल नंबर/ईमेल आईडी

नारी शक्ति पुरस्कार के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कैसे करे ?

सबसे पहले आपको नेशनल अवार्ड पोर्टल की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। इसके बाद वेबसाइट का होमपेज प्रदर्शित हो जाएगा।

होम पेज खुल जाने पर आपको “रजिस्ट्रेशन” के विकल्प पर क्लिक करना होगा। इसके बाद आपके सामने वेबसाइट का नया पेज प्रदर्शित होगा।

अब इस नए पेज पर आपके सामने “रजिस्ट्रेशन फॉर्म” खुल जाएगा, जिसमे आपको सभी विवरण एवं निम्नलिखित जानकारी दर्ज करनी होगी जैसे-

नॉमिनेट की टाइप, नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल, I’d डॉक्युमेंट, कैप्चा कोड आदि।

उपरोक्त सभी विवरण ध्यानपूर्वक भरने के पश्चात आपको “सबमिट” के विकल्प पर क्लिक करके इस आवेदन फॉर्म को सबमिट करना होगा।

सबमिट करने के बाद अब आपको “लॉगइन” की ऑप्शन पर क्लिक करना होगा और लॉगिन के बाद आपको “नारी शक्ति पुरस्कार” के विकल्प पर क्लिक करना होगा।

क्लिक करने के बाद नए पेज पर आपके सामने आवेदन पत्र प्रदर्शित होगा, जिसमे आपको पूछी गई सभी महत्वपूर्ण जानकारी दर्ज करनी होगी।

सभी आवश्यक जानकारी दर्ज करने के बाद अब आपको सभी महत्वपूर्ण दस्तावेजों को अपलोड करना होगा एवं आपको सबमिट के विकल्प पर क्लिक करके इस आवेदन पत्र को सबमिट करना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया अहम फैसला, अविवाहित महिला को भी गर्भपात का अधिकार।

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सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में अविवाहित महिला को 24 हफ्ते के गर्भ को गिराने की इजाजत दे दी है।

जस्टिस चंद्रचूड़ की बेंच ने दिल्ली हाई कोर्ट फैसले को पलटते हुए कहा कि अदालत का काम अपनी बुद्धि और विवेक का इस्तेमाल करना है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विवाहित महिलाओं की तरह कुंआरी लड़कियों को भी गर्भपात का अधिकार है।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने कहा कि गर्भपात से सिर्फ इसलिए इनकार नहीं किया जा सकता कि महिला अविवाहित है। बेंच ने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी ऐक्ट में 2021 के संशोधन का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें पति की जगह पार्टनर का जिक्र है। अदालत ने कहा यह बात ही कानून की मंशा को दर्शाती है कि यह अविवाहित महिलाओं को भी दायरे में रखता है।

2021 के संशोधन के बाद, मेडिकल टर्मिनेशन आफ प्रेग्नेंसी एक्ट की धारा-तीन में पति के बजाय पार्टनर शब्द का उपयोग किया गया है, यह अधिनियम में अविवाहित महिलाओं को कवर करने के लिए विधायी मंशा को दर्शाता है।

केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2021 में कानून में बदलाव करते हुए गर्भपात के कुछ शर्तों के साथ गर्भपात का 20 हफ्तों से बढ़ाकर 24 हफ्ते कर दी थी. इस बदलाव में रेप विक्टिम से लेकर शादी का स्टेटस बदले जाने पर प्रेग्नेंसी टर्मिनेशन का समय 24 हफ्ते कर दिया गया था.

रेप या सेक्सुअल असॉल्ट की विक्टिम को या किसी नजदीकी रिश्तेदार के कारण महिला विक्टिमाइज हो. किसी नाबालिक लड़की की प्रेग्नेंसी के मामले में टर्मिनेशन 24 हफ्ते तक है. अगर कोई महिला प्रेग्नेंट है और वह उसी समय विधवा हो जाती है या उसका तलाक हो जाता है जिससे उसका मेरिटल स्टेटस बदल जाता है तो 24 हफ्ते तक गर्भपात हो सकता है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रतिबंधात्मक दृष्टिकोण अपनाया, सुप्रीम कोर्ट

महिला ने पहले दिल्ली हाईकोर्ट में अर्जी की, अपनी याचिका में कहा कि वह बच्चे को जन्म नहीं दे सकती क्योंकि वह एक अविवाहित महिला है और उसके साथी ने उससे शादी करने से मना कर दिया है। इसमें आगे कहा गया कि अविवाहित तौर पर बच्चे को जन्म देने से उसका बहिष्कार होगा और साथ ही मानसिक पीड़ा भी होगी।

16 जुलाई को दिल्ली हाई कोर्ट ने 23 सप्ताह की गर्भावस्था को समाप्त करने की मांग वाली अविवाहित मणिपुरी महिला की याचिका पर विचार करने से इन्कार कर दिया था, कोर्ट ने कहा था कि गर्भ सहमति से धारण किया गया है और यह स्पष्ट रूप से मेडिकल टर्मिनेशन आफ प्रेग्नेंसी रूल्स, 2003 के तहत किसी भी खंड में शामिल नहीं है।

बाद में महिला ने सुप्रीमकोर्ट में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी, अर्जी में महिला ने मेडिकल टर्मिनेशन आफ प्रेग्नेंसी रूल्स, 2003 के नियम-3 B को चुनौती दी थी जोकि केवल कुछ श्रेणियों की महिलाओं को 20 से 24 सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने की अनुमति देता है।

पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता को केवल इस आधार पर लाभ से वंचित नहीं किया जाना चाहिए कि वह अविवाहित महिला है, दिल्ली हाई कोर्ट ने अनुचित प्रतिबंधात्मक दृष्टिकोण अपनाया है।

रिश्ते में खटास आने पर दुष्कर्म का केस दर्ज नहीं करा सकती महिला।

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सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक़, एक महिला जो किसी पुरुष के साथ रिश्ते में थी और स्वेच्छा से उसके साथ रह रही थी, वह रिश्ते में खटास आने पर दुष्कर्म का मामला दर्ज नहीं कर सकती।

सुप्रीम कोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ ही दुष्कर्म, अप्राकृतिक अपराधों और आपराधिक धमकी के आरोप को सही नही बताया।

कोर्ट ने कहा कि रिश्तों में इस बदलाव के कारण इन जोड़ों के टूटने और दूसरों से शादी करने के बाद बलात्कार के आरोपों की संख्या बढ़ रही है। हालांकि, इसका हमेशा यह अर्थ नहीं होता है कि किसी एक साथी को शादी के झूठे वादे पर यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर किया गया था।

रिश्ते में खटास आने को बलात्कार नहीं माना जाएगा, वर्तमान सामाजिक संदर्भ में, हमारे पास लिव-इन रिलेशनशिप और ओपन मैरिज हैं, व्यावहारिक रूप से, शादी की उम्र भी अब बदल गई है, 28 साल या 29 साल की लड़कियां इन दिनों शादी के लिए तैयार नहीं हैं।

वे अपनी आजादी का आनंद ले रहे हैं, लेकिन मुश्किल यह है कि बलात्कार के आरोप हमेशा तब सामने आते हैं, जब ये रिश्ते कड़वे हो जाते हैं।

जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, एक महिला जो किसी पुरुष के साथ रिश्ते में थी और स्वेच्छा से उसके साथ रह रही थी, वह रिश्ते में खटास आने पर दुष्कर्म का मामला दर्ज नहीं कर सकती, सुप्रीम कोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ ही दुष्कर्म, अप्राकृतिक अपराधों और आपराधिक धमकी के आरोपी अंसार मोहम्मद को अग्रिम जमानत दे दी।

जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने अपने आदेश में कहा, शिकायतकर्ता स्वेच्छा से अपीलकर्ता के साथ रह रही थी और रिश्ते में थी, इसलिए अब यदि संबंध में खटास आ गई तो यह आईपीसी की धारा-376 (2) (N) अपराध के लिए प्राथमिकी दर्ज करने का आधार नहीं हो सकता है।

अदालत ने अपील को स्वीकार किया और राजस्थान हाईकोर्ट के उस आदेश को दरकिनार कर दिया जिसमें अपीलकर्ता को गिरफ्तारी से पहले जमानत देने से इन्कार कर दिया था। राजस्थान हाईकोर्ट ने आपराधिक प्रक्रिया संहिता (crpc) की धारा-438 के तहत अग्रिम जमानत के लिए दायर अंसार की याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद उसने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

अदालत का तर्क

हाईकोर्ट ने कहा था, यह एक स्वीकृत स्थिति है कि याचिकाकर्ता ने शिकायतकर्ता से शादी करने का वादा करके उसके साथ संबंध बनाए थे और उनके संबंध के कारण एक बच्चे का जन्म हुआ था। इसलिए अपराध की गंभीरता को देखते हुए हम याचिकाकर्ता को अग्रिम जमानत देने का उपयुक्त मामला नहीं मानते।

सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि कहा, शिकायतकर्ता ने यह स्वीकार किया है कि वह चार साल तक अपीलकर्ता के साथ रिश्ते में थी और जब रिश्ता शुरू हुआ तब उसकी उम्र 21 साल थी। शीर्ष अदालत ने इन बातों को ध्यान में रखते हुए अपीलकर्ता को अग्रिम जमानत देने का फैसला किया।

असाधारण शक्तियों के गलत इस्तेमाल को ध्यान में रखके फैसले के खिलाफ सुनवाई ज़रूरी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून का उपयोग करके किसी पर लगाए गए जुट्ठे आरोप को ध्यान में रखके फैसला करना जरूरी

फैसले के खिलाफ सुनवाई में असाधारण शक्तियों के इस्तेमाल में संयम जरूरी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, किसी फैसले के खिलाफ अपील पर सुनवाई करते वक्त संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत उसे मिली असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल बड़े संयम से किया जाना चाहिए, ताकि न्याय की हत्या न हो, इसमें देश के किसी भी कोर्ट, न्यायाधिकरण आदि के फैसले शामिल हैं।

जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस कृष्ण मुरारी की पीठ ने हत्या के दोषी मेकाला शिवैया की याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की, शिवैया को निचली अदालत व हाईकोर्ट ने अमरावती की सब्जी मंडी में 6 सितंबर 2006 को एक किसान की हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

शिवैया ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जस्टिस कृष्ण मुरारी ने आदेश में लिखा, अनुच्छेद 136 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल कर दखल तब ही दिया जा सकता है जब पहले कोर्ट के फैसलों में कोई गलती हो।

साथ ही इस बात का ध्यान देना होता है कि कहीं दखल से न्याय की हत्या न हो, पिछले फैसलों का उल्लेख करते हुए पीठ ने कहा, साक्ष्यों की दोबारा जांच कराना सुप्रीम कोर्ट का काम ही नहीं हैं, हम सिर्फ ये देखते हैं कि निचली अदालत और हाईकोर्ट का फैसला सही है या नहीं।

ऐसा सिर्फ दुर्लभ और बेहद असाधारण मामलों में होता है जहां गलत तरह से देखने या साक्ष्यों की अनदेखी के कारण फैसलों में न्याय की हत्या होती है, यह कोर्ट ऐसी ही स्थिति में साक्ष्यों की दोबारा जांच कराती है।

पीठ ने कहा, इन फैसलों में सांविधानिक योजना का सही शब्दों में उल्लेख किया गया है और स्पष्ट किया गया है कि इस अनुच्छेद के तहत मिली शक्तियों को किसी भी तकनीकी बाधा से बाधित नहीं किया जा सकता, पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट हर आपराधिक मामले में अपील वाले नियमित कोर्ट की तरह काम नहीं करता।

पासपोर्ट को कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट के साथ जोड़ने की प्रक्रिया | Covid Vaccine Certificate Link with Passport

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पासपोर्ट की कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट के साथ रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया, (Covid Vaccine Certificate Link Registration)

अपने पासपोर्ट को कोविड-19 वैक्सीन के सर्टिफिकेट के साथ लिंक कराना अनिवार्य है क्योंकि आपसे यात्रा के दौरान यह पूछा जाएगा और उसकी जांच की जाएगी।

कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट को पासपोर्ट के साथ जोड़ना ज़रूरी है।

वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखते हुए कोविड-19 के संक्रमण से बचने के लिए कोविड-19 की वैक्सीन लगवाना अनिवार्य हो गया है, ऐसे में कई देश अपने देश में एंट्री करने से पहले लोगों का कोविड-19 वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट देखते हैं।

भारत सरकार ने एक अच्छी सुविधा प्रदान की हे, जिसमें अपने पासपोर्ट को कोविड-19 वैक्सीन सर्टिफिकेट के साथ लिंक कर सकते हैं, और कहीं पर भी यात्रा करते समय आप उसे दिखा सकते हैं।

सरकार की कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट और पासपोर्ट गाइडलाइन

कोरोना का खतरा होने के नाते कोरोना वैक्सीन लगवाना बहुत जरूरी हो गया है, ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति ने कोविन ऐप्लीकेशन में अपना रजिस्ट्रेशन जरूर कराया है।

हाल ही में आरोग्य सेतु एप्लीकेशन के ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट से यह जानकारी प्राप्त हुई है, कि जो भी इंटरनेशनल यात्रा करना चाहते हैं वह अपने पासपोर्ट को वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट के साथ कनेक्ट कर सकते हैं, यह पूरी सुविधा आपको कोविन एप्प पर मिल जाएगी।प्रक्रिया

कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट की पासपोर्ट के साथ लिंक करने की प्रक्रिया

सबसे पहले आप कोविन एप्प की ऑफिशियल लिंक पर जाएं जहां पर आपको अपनी लॉगइन डीटेल्स अर्थात आईडी और पासवर्ड दर्ज करना होगा।

जिन्होंने अभी तक cowin साइड में अपना रजिस्ट्रेशन नहीं किया है तो वह सबसे पहले अपना रजिस्ट्रेशन करें।

• रजिस्ट्रेशन करने के लिए cowin.gov.in की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं।

• वहां पर रजिस्ट्रेशन के विकल्प पर क्लिक करके अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें।

• जैसे ही आपका मोबाइल नंबर रजिस्टर हो जाएगा आपके मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी नंबर भेजा जाएगा, ओटीपी नंबर को स्क्रीन पर दिखाए गए विकल्प पर दर्ज करें।

• आप चाहे तो नीचे दिए गए विकल्प आरोग्य सेतु एप के जरिए भी अपना रजिस्ट्रेशन दर्ज करा सकते हैं।

• जैसे ही आप को मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन के बाद ओटीपी प्राप्त होगा आप इस एप्लीकेशन में रजिस्टर हो जाएंगे।

• यदि आपका पहले से अकाउंट है, तो आप मोबाइल नंबर डालने के बाद ओटीपी प्राप्त करेंगे और आप वहां पर लॉगिन हो जाएंगे।

• लॉग इन करने के बाद आपको स्क्रीन पर आपके अकाउंट डिटेल्स के सेक्शन में एक बटन दिखाई देगा जिस पर रेस एंड इश्यू लिखा होगा।

• उस विकल्प पर क्लिक करें जैसे ही आप उस विकल्प पर क्लिक करेंगे वहां पर एक dropdown-menu खुल जाएगा जिसमें ऐड पासपोर्ट डीटेल्स का विकल्प भी होगा।

• जैसे ही आप पासपोर्ट डीटेल्स के विकल्प पर क्लिक करेंगे आप एक नए पेज पर पहुंच जाएंगे जहां पर आपको पासपोर्ट डीटेल्स में दो विकल्प दिखाई देंगे।

नाम और मेंबर के नाम डाले : जहां पर आपको उस व्यक्ति का नाम डालना होगा जिसका पासपोर्ट आप कोविड-19 वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट के साथ लिंक कराना चाहते हैं।

उस एप्लीकेशन में आप अपने परिवार के दो या तीन सदस्यों को इसमें जोड़ सकते हैं, तो अगर आपके अकाउंट में दो या तीन मेंबर हैं तो उनमें से किस नंबर का पासपोर्ट आप सर्टिफिकेट के साथ लिंक कराना चाहते हैं इस बात की जानकारी आपको यहां देनी होगी।

पासपोर्ट नंबर डालें : दूसरे विकल्प में आपको उस व्यक्ति का पासपोर्ट नंबर दर्ज कराना होगा।

दोनों जानकारियों को बहुत ध्यान से भरें और अच्छी तरह चेक जरूर कर ले।

दोनों जानकारी ध्यान पूर्वक भरने के बाद नीचे दिए गए बॉक्स में क्लिक करें और अपनी रिक्वेस्ट सबमिट करने के लिए सबमिट रिक्वेस्ट के बटन पर क्लिक कर दे।

उसके बाद आप वापस से अकाउंट डिटेल पेज पर चले जाइए और सर्टिफिकेट के बटन पर क्लिक कीजिए।

इस बटन पर क्लिक करने के बाद आप उस व्यक्ति का नाम दर्ज करें जिसकी पासपोर्ट डिटेल आपने वहां पर दर्ज की थी।

अब आप यहां से नया वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट डाउनलोड कर सकते हैं जो आपके पासपोर्ट के साथ लिंक हो चुका है।

आप इस प्रक्रिया के जरिए अपने कोविड-19 वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट को अपने पासपोर्ट के साथ लिंक कर सकते हैं जिसके बाद आप भारत के बाहर किसी भी दूसरे देश में यात्रा के लिए जा सकते हैं।

वैक्सीन सर्टिफिकेट को पासपोर्ट के साथ लिंक करने का क्या फायदा।

यदि आप किसी दूसरे देश में यात्रा के लिए जा रहे हैं वहां पर चेकिंग के दौरान आपसे वैक्सीनेशन के लिए पूछा जाएगा तो आप आसानी से इस रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट को दिखा सकते हैं जिसमें आपका वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट भी जुड़ा हो।

आपको अलग से वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट दिखाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

 

Trademark Law|भारत में ट्रेडमार्क कानून, ट्रेडमार्क के प्रकार, पंजीकरण प्रक्रिया।

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ट्रेडमार्क एक शब्द, चिन्ह और प्रतीक या यहां तक ​​कि ग्राफिक भी हो सकता है, जो किसी कंपनी, सामान या सेवाओं पर लागू किया जाता है ताकि उन्हें अन्य प्रतिस्पर्धियों से अलग किया जा सके।

उदाहरण के लिए एक ब्रांड, उत्पाद, कंपनी का नाम या लोगो, यह उपभोक्ताओं को उनकी विशिष्ट विशेषताओं और गुणवत्ता के आधार पर उत्पादों और सेवाओं की पहचान और खरीद में सक्षम बनाता है।

एक ट्रेडमार्क लोगो, छवियों, शब्दों, छोटे वाक्यांशों, से बना हो सकता है। सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले शब्द और चित्र हैं, हालांकि, अन्य विशिष्ट चिह्नों का भी उपयोग किया जा सकता है यदि वे चित्रमय प्रतिनिधित्व में सक्षम हैं।

ट्रेडमार्क मूल्यवान व्यावसायिक संपत्ति हैं और भले ही यह कानून के तहत अनिवार्य नहीं है, यह सलाह दी जाती है कि अपंजीकृत ट्रेडमार्क के रूप में पंजीकृत चिह्न केवल सीमित सुरक्षा प्राप्त करता है।

पंजीकरण के बाद, यदि कोई अन्य व्यवसाय समान या समान चिह्न लगाने का प्रयास करता है, तो इसे रोकने के लिए एक उचित कानूनी उपाय होगा।

एक ट्रेडमार्क नाम सभी उत्पादों और सेवाओं को मालिक के रूप में चिह्नित करता है और किसी और का नकली उत्पादों के कारण प्रतिष्ठा के नुकसान को भी रोकता है।

एक ट्रेडमार्क 10 वर्षों के लिए वैध होता है और इसे अतिरिक्त शुल्क के भुगतान पर अनिश्चित काल के लिए नवीनीकृत किया जा सकता है। ट्रेडमार्क अधिकार निजी अधिकार हैं और सुरक्षा अदालत के आदेशों के माध्यम से लागू की जाती है।

भारत में, व्यापार चिह्न अधिनियम, 1999 ट्रेडमार्क के कई पहलुओं जैसे पंजीकरण, संरक्षण, उल्लंघन के मामले में राहत के प्रावधान आदि से संबंधित है, भारत पेरिस सम्मेलन और ट्रिप्स समझौते का एक हस्ताक्षरकर्ता है और इसलिए अधिनियम सिद्धांतों के अनुरूप है।

ट्रेडमार्क के प्रकार

एक ट्रेडमार्क को निम्नलिखित श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है।

शब्द चिह्न (Word marks)

वे शब्द, अक्षर या अंक हो सकते हैं, जैसे: बालाजी वैफर्स, पतंजली, बजाज।

उपकरण चिह्न (Device marks)

इन चिह्नों में किसी शब्द, अक्षर या संख्यात्मक का अनन्य प्रतिनिधित्व होता है, जैसे: जिस तरह से Paytm लिखा जाता है या EBAY लिखा जाता है।

आलंकारिक चिह्न (Figurative marks)

उनमें एक आकृति या एक लोगो होता हे, उदाहरण: SBI, Nike का SWOOSH चिह्न।

सेवा चिह्न (Service Marks)

सेवा चिह्न मूल रूप से एक व्यक्ति की सेवाओं (सामान नहीं) को दूसरे व्यक्ति से अलग करता है।

उदाहरण: यूनाइटेड एयरलाइंस का नाम, फ्लाई द फ्रेंडली स्काई टैगलाइन, और विश्व मानचित्र का लोगो सेवा चिह्न हैं, ऐसा इसलिए है क्योंकि यूनाइटेड एक सेवा प्रदान करता है: दुनिया भर में एयरलाइन उड़ानें।

सामूहिक चिह्न (Collective Marks)

कंपनियों के समूह द्वारा उपयोग किए जा रहे चिह्न, ऐसे चिह्नों का स्वामी कोई संघ या सार्वजनिक संस्था या सहकारी हो सकता है।

उदाहरण: प्रमाणित सार्वजनिक लेखाकारों की सोसायटी के सदस्यों को इंगित करने के लिए चार्टर्ड एकाउंटेंट्स संस्थान द्वारा उपयोग किया जाने वाला का और CPA चिह्न, डॉक्टर का चिह्न।

प्रमाणन चिह्न ( Certification Marks )

प्रमाणन चिह्नों का उपयोग मानकों को परिभाषित करने के लिए किया जाता है, वे उपभोक्ताओं को आश्वस्त करते हैं कि उत्पाद कुछ निर्धारित मानकों को पूरा करता है, जैसे: ISI मार्क और FSSAI मार्क।

जाने-माने निशान ( Famous marks )

जब किसी निशान को आबादी के एक बड़े प्रतिशत के बीच आसानी से पहचाना जाता है तो वह एक प्रसिद्ध चिह्न का दर्जा हासिल कर लेता है। उदाहरण: रोलेक्स, SBI, फेरारी।

अपरंपरागत ट्रेडमार्क (Unconventional Trademarks)

अपरंपरागत ट्रेडमार्क वे ट्रेडमार्क हैं जिन्हें उनकी स्वाभाविक विशिष्ट विशेषता के लिए मान्यता मिलती है।

रंग ट्रेडमार्क : कैडबरी चॉकलेट का बैंगनी रंग का ट्रेडमार्क

ध्वनि चिह्न : एक प्रसिद्ध ध्वनि ट्रेडमार्क हेमग्लास आइसक्रीम वैन जिंगल है।

आकार के निशान (3D निशान): कोका कोला की बोतल।

गंध के निशान : ब्राज़ीलियाई फुटवियर कंपनी ग्रेंडिन ने जून, 2015 में बबल गम-सुगंधित जेली सैंडल की अपनी लाइन को सफलतापूर्वक ट्रेडमार्क किया।

ट्रेडमार्क का पंजीकरण करने की प्रक्रिया

ट्रेडमार्क आवेदन दाखिल करने पर, रजिस्ट्री एक आधिकारिक रसीद जारी करती है जिसमें दाखिल करने की तारीख और आवेदन संख्या होती है।

फिर भारतीय ट्रेडमार्क कार्यालय आवेदन की जांच करता है, यह सुनिश्चित करने के लिए कि इसे ट्रेडमार्क अधिनियम के तहत पंजीकृत किया जा सकता है और यदि पंजीकरण पर कोई आपत्ति उठाई जाती है, तो रजिस्ट्री आवेदक को एक परीक्षा रिपोर्ट जारी करती है।

इसके बाद आवेदक को लिखित जवाब दाखिल करना होता है या अर्जित विशिष्टता का सबूत देना होता है और उसके बाद परीक्षक के साथ सुनवाई पोस्ट की जाती है।

यदि परीक्षा और सुनवाई के बाद, रजिस्ट्रार द्वारा ट्रेडमार्क की अनुमति दी जा सकती है, आवेदक को स्वीकृति पत्र जारी किया जाता है, जिसके बाद ट्रेडमार्क जर्नल में ट्रेडमार्क प्रकाशित किया जाता है।

प्रकाशन के बाद, यह प्रकाशन की तारीख से 4 महीने के लिए विरोध के लिए खुला रखा जाता है, यदि इन 4 महीनों में कोई आपत्ति नहीं की जाती है, तो प्रमाण पत्र जारी किया जाता है और आपत्ति के मामले में दोनों पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया जाता है।

ट्रेडमार्क पंजीकरण एक कठिन प्रक्रिया है और बिना किसी आपत्ति या विरोध के मामलों में पंजीकरण प्राप्त करने में आमतौर पर लगभग 18-24 महीने लगते हैं।

एक बार ट्रेडमार्क पंजीकृत हो जाने के बाद, यह आवेदन की तारीख से 10 साल की अवधि के लिए वैध होता है।

पंजीकरण को तब तक अनिश्चित काल के लिए नवीनीकृत किया जा सकता है जब तक कि नवीनीकरण शुल्क हर 10 वर्षों में भुगतान किया जाता है।

वर्णनात्मक ट्रेडमार्क (DESCRIPTIVE MARKS)

एक वर्णनात्मक ट्रेडमार्क जो उस उत्पाद या सेवा की विशेषताओं की पहचान करता है जिससे चिह्न संबंधित है, यह एक विशेषण के समान है।

उदाहरण के लिए, होटल के लिए चिन्ह में एक प्लेट के साथ चम्मच का वर्णन करने के लिए जिस चिह्न का उपयोग करते हैं, वह एक वर्णनात्मक ट्रेडमार्क के रूप में जाना जाता है।

एक चिह्न वर्णनात्मक होता है यदि इसके सामान्य उपयोग में यह उस चीज़ का यथोचित रूप से संकेत देता है जिसका उपयोग करने का इरादा है। वर्णनात्मक होने के लिए, यह पर्याप्त है यदि जानकारी को कवर किए गए उत्पाद की सामान्य प्रकृति और चरित्र के अनुसार प्रदान किया जाता है और यह आवश्यक नहीं है कि शब्दों में एक स्पष्ट, पूर्ण और सटीक विवरण शामिल हो।

किसी चिह्न का माल के चरित्र और गुणवत्ता का सीधा संदर्भ है, शब्द को उसके सख्त व्याकरणिक अर्थों में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह माना जाना चाहिए कि बड़े पैमाने पर जनता द्वारा इसे कैसे लक्षित किया जाएगा।

यह सिद्ध करने के लिए कि कोई शब्द वर्णनात्मक है, उसे समग्र रूप में वर्णनात्मक दिखाना पड़ता है, वर्णनात्मक होने के कारण इसे आपत्तिजनक बनाने के लिए इसे टुकड़ों में विभाजित नहीं किया जा सकता है।

विचाराधीन चिह्न उस माल से संबंधित होना चाहिए जो इसे कवर करता है और फिर यह देखा जाना चाहिए कि चिह्न विशेष सामान के औसत खरीदार के लिए क्या संकेत देगा और चिह्न के प्रति उसकी मानसिक प्रतिक्रिया क्या होगी।

यह निहित है कि एक शब्द जिसमें माल के चरित्र और गुणवत्ता के लिए केवल एक अप्रत्यक्ष संदर्भ है, वर्णनात्मक शब्दों के रूप में वर्गीकृत नहीं होता है।

ट्रेडमार्क के रूप में पंजीकृत होने वाले किसी शब्द की पात्रता के लिए आपत्तिजनक बात यह है कि इसका सीधा संदर्भ माल के चरित्र और गुणवत्ता से है।

एक शब्द जो केवल माल के संदर्भ में विचारोत्तेजक है, वह इसे ट्रेडमार्क के रूप में अनुपयुक्त नहीं बनाता है, यह विश्लेषण करने के लिए कि क्या किसी शब्द का सीधा संदर्भ है या माल के चरित्र और गुणवत्ता का केवल सूचक है, सख्त व्याकरणिक अर्थ नहीं बल्कि जनता की धारणा को ध्यान में रखा जाता है।

उदाहरण: सामान्य समय के टुकड़ों और घड़ियों के संबंध में स्पीडमास्टर शब्द का माल के चरित्र और गुणवत्ता का कोई सीधा संदर्भ नहीं है, अर्थात, समय के टुकड़े उनकी सामान्य विशेषता के रूप में समय को मापना और इंगित करना है।

स्पीडमास्टर शब्द में समय का कोई उल्लेख नहीं है और इसलिए यह नहीं कहा जा सकता है कि इसका माल से सीधा संबंध है और इसलिए इसे पंजीकृत किया जा सकता है।

लक्ज़री ब्रांड के लिए LUXECLOTHING शब्द का सीधा संदर्भ उस सामान से है जो इस नाम से बिकेगा और बाज़ार में पहले से ही कई लक्ज़री ब्रांड मौजूद हैं, इसलिए LuxeClothing शब्द की अनुमति नहीं होगी।

जिन शब्दों का कोई सीधा संदर्भ नहीं है और जो माल के संबंध में कोई अर्थ नहीं बताते हैं, उन्हें ट्रेडमार्क के रूप में पंजीकृत होना सबसे अच्छा है। उदाहरण के लिए: जई के लिए क्वेकर, साबुन के लिए धूप, जूता पॉलिश के लिए कोबरा और मादक पेय के लिए सफेद घोड़ा

अधिनियम के अलावा, यह हमेशा माना गया है कि एक शब्द जिसमें माल का नाम या विवरण होता है, ट्रेडमार्क नहीं हो सकता है और इसे एकाधिकार नहीं दिया जा सकता है।

भले ही एक विशिष्ट समय पर, आवेदक माल का एकमात्र उत्पादक है, उसे उस शब्द के लिए एकाधिकार नहीं दिया जा सकता है जो माल का उपयुक्त वर्णन करता है।

विवरण के शब्द सभी मानव जाति की संपत्ति हैं और किसी भी व्यक्ति के लिए उन पर एकाधिकार करना और दूसरों को उनके उपयोग से बाहर करना सही नहीं होगा।

धारा 9(1) के तहत पंजीकरण

कानून के अनुसार, वर्णनात्मक अंकों के पंजीकरण की अनुमति नहीं है। सामान्य परिस्थितियों में वर्णनात्मक अंकों को ट्रेडमार्क अधिनियम की धारा 9(1) के तहत पंजीकरण नहीं दिया जाना चाहिए।

हालाँकि, अदालतों ने व्याख्या की है कि वर्णनात्मक अंकों का पंजीकरण केवल असाधारण परिस्थितियों में ही किया जा सकता है, यदि कोई चिह्न अपने आप में वर्णनात्मक है, लेकिन व्यापार में इसके लंबे समय तक उपयोग के कारण इसका प्राथमिक वर्णनात्मक अर्थ खो गया है और इससे संबंधित वस्तुओं के संबंध में विशिष्ट हो गया है, तो इसे पंजीकृत किया जा सकता है।

इसलिए, कंप्यूटर के लिए इंटरनेशनल बिजनेस मशीन (IBM), टेलीविजन के लिए शार्प, और पेय पदार्थों को पुनर्जीवित करने के लिए ग्लूकोन-डी जैसे अंक, इन असाधारण परिस्थितियों में पंजीकृत हैं या हो सकते हैं।

मैरिको के मामले में दिल्ली HC की डिवीजन बेंच के हालिया फैसले में, माननीय दिल्ली HC ने यह माना है कि: “जब वर्णनात्मक ट्रेडमार्क का उपयोग केवल एक व्यक्ति द्वारा बहुत लंबे समय तक बिना किसी और प्रयास के किया जाता है, बिना किसी अन्य प्रयास के इस लंबी अवधि के दौरान ट्रेडमार्क का उपयोग करने के लिए, एक वर्णनात्मक शब्द का मामला स्थापित किया जा सकता है जिसमें विशिष्टता और द्वितीयक अर्थ प्राप्त हो।”

यह उपरोक्त प्रस्ताव को मजबूत करता है कि वर्णनात्मक ट्रेडमार्क को तब तक पंजीकरण की अनुमति नहीं है जब तक कि लंबे समय तक उपयोग के परिणामस्वरूप विशिष्टता का एक मजबूत मामला न हो।

अधिग्रहित विशिष्टता ( ACQUIRED DISTINCTIVENESS )

प्रत्येक ट्रेडमार्क उनके तहत बेचे गए सामान की पहचान एक विशेष स्रोत से निकलने वाले माल के रूप में करता है, समय बीतने के साथ यह मजबूत हो जाता है और एक विशेष ट्रेडमार्क पंजीकृत हो जाता है या उपभोक्ताओं के दिमाग में उत्पाद और उसके स्रोत के विशिष्ट के रूप में मानसिक रूप से जुड़ा होता है।

कुछ ट्रेडमार्क अपने अंतर्निहित पात्रों के कारण अपनी स्थापना से अलग होते हैं और उन्हें ट्रेडमार्क के रूप में उपयोग करने पर तुरंत कानूनी सुरक्षा दी जाती है, जबकि कुछ निशान द्वितीयक अर्थ के कारण सुरक्षा प्राप्त करते हैं जो वे समय के साथ प्राप्त करते हैं।

अगर हम डेटोल या डालडा के मामले पर विचार करें, तो वे मूल रूप से ब्रांड नाम थे, लेकिन अब वे उत्पाद के संदर्भ में इस हद तक कम हो गए हैं कि भले ही हम उसी उत्पाद को किसी अन्य ब्रांड नाम के तहत खरीदते हैं, जो छवि हमारे पास आती है मन डेटॉल और डालडा का ही है, यह अर्जित विशिष्टता है।

मूल रूप से, इसका तात्पर्य यह है कि कुछ शब्द, हालांकि मुख्य रूप से चरित्र और वस्तुओं या सेवाओं की गुणवत्ता के विशिष्ट हैं, उनका वर्णनात्मक अर्थ खो सकते हैं और उपयोग के कारण विशिष्टता प्राप्त कर सकते हैं। मार्क जो स्वाभाविक रूप से विशिष्ट नहीं है, लेकिन समय की अवधि में व्यापक और महत्वपूर्ण उपयोग के आधार पर, उपभोक्ताओं को उत्पाद या सेवाओं के साथ मार्क को जोड़ने के लिए राजी करता है, तो मार्क को ‘अर्जित विशिष्टता’ कहा जाता है।

1999 का ट्रेडमार्क अधिनियम अप्रत्यक्ष रूप से धारा 9 (1) और धारा 32 के प्रावधान के तहत ‘अधिग्रहित विशिष्टता’ या ‘द्वितीयक अर्थ’ से संबंधित है। वर्णनात्मक ट्रेडमार्क का पंजीकरण अधिनियम की धारा 9 (1) (बी) के तहत निषिद्ध है।

हालांकि धारा 9(1) के प्रावधान में प्रावधान है कि एक व्यापार चिह्न पंजीकरण से इनकार नहीं किया जाएगा यदि पंजीकरण के लिए आवेदन की तारीख से पहले इसके उपयोग के परिणामस्वरूप एक विशिष्ट चरित्र प्राप्त कर लिया है या एक प्रसिद्ध व्यापार चिह्न है।

इसके अलावा धारा 32 में यह भी प्रावधान है कि “जहां धारा 9 की उप-धारा (1) के उल्लंघन में एक व्यापार चिह्न पंजीकृत है, इसे अमान्य घोषित नहीं किया जाएगा, यदि इसके उपयोग के परिणामस्वरूप, पंजीकरण के बाद इसका उपयोग किया गया है, और इस तरह के पंजीकरण की वैधता को चुनौती देने वाली किसी भी कानूनी कार्यवाही के शुरू होने से पहले माल या सेवाओं के संबंध में एक विशिष्ट चरित्र प्राप्त कर लिया जिसके लिए यह पंजीकृत है।

अधिनियम उन कारकों पर बहुत मौन है जिन पर यह आकलन करते समय विचार किया जाना चाहिए कि क्या ‘चिह्न ने ‘विशिष्टता हासिल कर ली है’ या ‘द्वितीयक अर्थ प्राप्त कर लिया है।

भारत में, न्यायालय और IPAB यह स्थापित करने के लिए सिद्धांतों को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं कि चिह्न ने विशिष्टता हासिल की है या नहीं।

केवल एक चिह्न के उपयोग का मतलब यह नहीं है कि यह विशिष्ट प्रदान किया गया है, बढ़ा हुआ उपयोग भी ऐसा नहीं करता है, उपयोग और बढ़ा हुआ उपयोग किसी भी सामग्री के विशिष्ट अर्थ में होना चाहिए।

विचाराधीन उपयोग केवल उपभोक्ताओं या उत्पादों के अंतिम उपयोगकर्ताओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यापार से संबंधित अन्य लोगों जैसे निर्माताओं, थोक विक्रेताओं और खुदरा विक्रेताओं तक भी विस्तारित है।

गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया लिमिटेड बनाम गिरनार फूड्स एंड बेवरेजेज लिमिटेड में, यह माना गया था कि एक वर्णनात्मक ट्रेडमार्क सुरक्षा का हकदार हो सकता है यदि उसने एक द्वितीयक अर्थ ग्रहण किया है जो इसे किसी विशेष उत्पाद के साथ या किसी विशेष स्रोत से होने के रूप में पहचानता है।

विशिष्टता का अधिग्रहण एक श्रमसाध्य और समय लेने वाली प्रक्रिया है। फिर भी 1919 के ब्रिटिश अधिनियम के विपरीत ट्रेडमार्क के विशिष्ट बनने के लिए कोई समय सख्ती से तय नहीं किया गया है, जिसमें कहा गया है कि 2 साल के वास्तविक उपयोग को पर्याप्त माना जाता था।

ऐसे मामले हो सकते हैं जहां विविध कारणों से एक ट्रेडमार्क वास्तव में कम समय में विशिष्ट हो जाता है या कोई अन्य मामला जहां ट्रेडमार्क कभी विशिष्टता प्राप्त नहीं करता है, इसलिए विशिष्टता हासिल करने के लिए आवश्यक समय अवधि के संबंध में किसी भी कठोर नियम को खारिज करना संभव नहीं है।

ईशी खोसला बनाम अनिल अग्रवाल में यह माना गया था कि द्वितीयक अर्थ प्राप्त करने के लिए, यह आवश्यक नहीं है, कि उत्पाद को कई वर्षों तक बाजार में होना चाहिए, यदि कोई नया विचार आकर्षक है, और जनता को आकर्षित करता है, तो यह हो सकता है रातों-रात हिट हो जाता है।

हालांकि कई निश्चित मामलों के माध्यम से, यह दिखाया गया है कि एक सामान्य वर्णनात्मक शब्द माल के संबंध में उपयोग करके एक माध्यमिक विशिष्ट अर्थ प्राप्त कर सकता है, हालाँकि यह स्थापित करना बेहद मुश्किल हो सकता है कि ऐसा शब्द वास्तव में विशिष्ट हो गया है और अपने प्राकृतिक अर्थ से अलग एक माध्यमिक अर्थ प्राप्त कर लिया है।

कठिनाई तब और बढ़ जाती है जब चिह्न न केवल वर्णनात्मक होता है बल्कि उत्पाद का नाम भी शामिल होता है जैसे कि एक शीर्ष या कटा हुआ गेहूं आदि के लिए डायबोलो, यह कठिनाई कभी-कभी दूर हो सकती है यदि कथित ट्रेडमार्क वास्तव में माल का विवरण है, लेकिन जनता इसे एक फैंसी शब्द के रूप में पहचानती है न कि एक वर्णनात्मक शब्द के रूप में।

आवेदक पर यह दिखाने का दायित्व है कि जो शब्द मुख्य रूप से माल की गुणवत्ता का वर्णन करता है वह वर्णनात्मक हो गया है। आवेदक द्वारा प्रत्येक वस्तु के संबंध में जिस पर ट्रेडमार्क लागू किया गया है, न कि केवल कई उत्पादों में से एक के लिए, जिस पर चिह्न लागू किया गया है, के संबंध में दायित्व का निर्वहन किया जाना चाहिए।

जब मामला सीमा रेखा पर होता है, तो रजिस्ट्रार आमतौर पर पंजीकरण देने से इनकार कर देगा, हालांकि, वह पंजीकरण से इनकार करने के कारणों की खोज करने की कोशिश नहीं करेगा। हालांकि, व्यापारी को वैधानिक संरक्षण के अपने अधिकार को स्थापित करने का उचित अवसर मिलना चाहिए।

यह निर्धारित करने में कि क्या लंबे और निरंतर उपयोग के कारण एक चिह्न ने एक विशिष्ट चरित्र प्राप्त कर लिया है, सक्षम प्राधिकारी को इस सबूत का समग्र मूल्यांकन करना चाहिए कि यह चिह्न किसी विशेष स्रोत से उत्पन्न होने वाले उत्पाद की पहचान करने के लिए आया है। एक चिह्न के विशिष्ट चरित्र का आकलन करने के लिए जिसके संबंध में पंजीकरण लागू किया गया है, निम्नलिखित को ध्यान में रखा जाना चाहिए:

• मार्क द्वारा आयोजित बाजार हिस्सेदारी।

• निशान का कितना गहन, भौगोलिक रूप से, व्यापक और लंबा, स्थायी उपयोग रहा है।

• बाजार को बढ़ावा देने के लिए उपक्रम द्वारा निवेश की गई राशि।

• व्यक्तियों के प्रासंगिक वर्ग का अनुपात जो किसी विशेष उपक्रम से आने वाले माल की पहचान करते हैं।

• विभिन्न व्यापार और वाणिज्य संघों के वक्तव्य।

यदि इन कारकों पर, सक्षम प्राधिकारी यह पाता है कि ट्रेडमार्क के कारण बड़ी संख्या में लोग माल की पहचान किसी विशेष स्रोत से उत्पन्न होने के रूप में करते हैं; यह माना जाना चाहिए कि निर्धारित चिह्न को पंजीकृत करने की आवश्यकता को पूरा किया गया है।

ट्रेडमार्क पर विवरण

यह कानून का एक अच्छी तरह से मान्यता प्राप्त मानक है कि एक व्यापारी या एक उद्यमी ट्रेडमार्क के रूप में वर्णनात्मक प्रकृति वाले किसी विशेष शब्द का उपयोग करने के लिए विशेष अधिकार प्राप्त कर सकता है यदि वह संतुष्ट है कि उसने एक माध्यमिक अर्थ या एक विशिष्ट चरित्र प्राप्त कर लिया है जिसमें निरंतर उपयोगकर्ता के लिए पर्याप्त समय की अवधि। शब्द का प्रयोग इस हद तक होना चाहिए कि, यह अपना प्राथमिक अर्थ खो चुका है और एक विशिष्ट चरित्र प्राप्त कर चुका है। जिस क्षण इसका उपयोग किया जाता है, उसे उपभोक्ता को मालिक के सामान की याद दिलानी चाहिए।

यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि, कोई पूर्ण नियम नहीं है कि जो चिह्न विशिष्टता से रहित है उसे ट्रेडमार्क के रूप में पंजीकृत नहीं किया जा सकता है।

इसके अलावा, अधिनियम इस बात पर चुप है कि यह निर्धारित करने के लिए कि क्या चिह्न ने अपने उपयोग या किसी अन्य कारकों के माध्यम से विशिष्टता हासिल कर ली है और वर्ष की न्यायपालिका ने इसे निर्धारित करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाई है।

विदेश व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम 1992 (FTDR अधिनियम), निर्यात पर कौन से नियंत्रण लगाए जाते हैं ?

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विदेश व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम 1992 (FTDR अधिनियम) भारत सरकार को निर्यात नीति तैयार करने और माल के निर्यात को प्रतिबंधित करने, प्रतिबंधित करने या अन्यथा विनियमित करने के आदेश जारी करने का अधिकार देता है।

भारत की विदेश व्यापार नीति 2015-2020 (FTP) के अनुसार, निर्यात और आयात ‘मुक्त’ होंगे, सिवाय इसके कि जब ‘निषेध’, ‘प्रतिबंध’ या ‘राज्य व्यापार उद्यमों (STE) के माध्यम से विशेष व्यापार’ के माध्यम से विनियमित किया जाता है।

निर्यात और आयात के भारतीय व्यापार वर्गीकरण (सामंजस्यपूर्ण प्रणाली) (ITC (HS)) में गिरावट आई है। सभी वस्तुओं के लिए आयात और निर्यात नीतियों को ITC (HS) में प्रत्येक आइटम के सामने दर्शाया गया है, ITC (HS) की अनुसूची 2 निर्यात नीति व्यवस्था को निर्धारित करती है।

निषिद्ध के रूप में वर्गीकृत माल को निर्यात करने की अनुमति नहीं है, दूसरी ओर, प्रतिबंधित वस्तुओं को निर्यात के लिए केवल डीजीएफटी द्वारा दिए गए प्राधिकरण, अनुमति या लाइसेंस के अनुसार या सरकार द्वारा जारी अधिसूचना/सार्वजनिक नोटिस में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अनुमति दी जा सकती है।

इसके अलावा, कुछ आइटम ऐसे हैं जो निर्यात के लिए ‘मुफ़्त’ हैं, लेकिन अन्य अधिनियमों या कुछ समय के लिए लागू कानून (FTP के पैराग्राफ 2.01 (B)) में निर्धारित शर्तों के अधीन हैं।

उन वस्तुओं का निर्यात जिन्हें DGFT से किसी प्राधिकरण, अनुमति या लाइसेंस की आवश्यकता नहीं है, को ITC (HS) के तहत ‘मुक्त’ के रूप में दर्शाया गया है।

इसके अलावा, विशिष्ट देशों को कुछ वर्गों के सामानों के निर्यात पर प्रतिबंध लागू होते हैं, FTDR अधिनियम, FTP और निर्यात नीति (ITC (HS) की अनुसूची 2) में निर्धारित प्रतिबंधों और प्रतिबंधों के अलावा, माल का निर्यात भी अन्य अधिनियमों या कानून में कुछ समय के लिए निर्धारित शर्तों के अधीन है।

निर्यात करते समय, एक निर्यातक को निर्यात के तहत माल के विवरण, प्रकृति और मात्रा की घोषणा करते हुए बंदरगाह पर सीमा शुल्क अधिकारियों के साथ एक शिपिंग बिल दाखिल करना होगा।

उक्त शिपिंग बिल के साथ पैकिंग सूची और चालान होना चाहिए, एक बार उक्त दस्तावेजों को सीमा शुल्क अधिकारियों द्वारा सत्यापित कर लिए जाने के बाद, माल का निर्यात किया जा सकता है।

जबकि अधिकांश उत्पाद निर्यात शुल्क के अधीन नहीं हैं, कुछ अपवाद हैं, जैसे कॉफी, चाय, काली मिर्च, चीनी, लौह अयस्क और इसके सांद्र, कच्चा कपास, कच्चा ऊन, विशिष्ट जूट आइटम, और लोहे के कुछ सामान या स्टील (ट्यूब और पाइप, बार और छड़)।

कौन से अधिकारी नियंत्रण संभालते हैं ?

सीमा शुल्क अधिनियम 1962 के प्रावधानों के तहत नियुक्त सीमा शुल्क अधिकारियों द्वारा सीमा शुल्क, एकीकृत माल और सेवा कर और अधिभार की वसूली और संग्रह किया जाता है।

माल के आयात और निर्यात के लिए आवश्यक दस्तावेज आवश्यकताओं को भी सीमा शुल्क अधिनियम 1962 और नियमों के तहत विनियमित किया जाता है।

इसके तहत तैयार किया गया है और आयात या निर्यात के बंदरगाह पर सीमा शुल्क अधिकारियों द्वारा सत्यापित किया गया है।

यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि आयात लाइसेंस, आयात या निर्यात पर शर्तें, प्रतिबंधित माल की अधिसूचना या आयात और निर्यात के लिए निषिद्ध सामान आदि से संबंधित आवश्यकताएं सभी विदेश व्यापार नीति 2015 के साथ पढ़े गए FTDR अधिनियम के प्रावधानों के तहत DGFT द्वारा विनियमित हैं।

इस प्रकार, आयात या निर्यात से संबंधित प्रलेखन के संबंध में नियंत्रण सीमा शुल्क द्वारा विनियमित होते हैं, जबकि लाइसेंस और संबंधित संबंधित दस्तावेजों के संबंध में नियंत्रण DGFT द्वारा विनियमित होते हैं।

अलग उत्पादों पर अलग नियंत्रण लगाया जाता है ? क्या ऐसे उत्पादों के निर्यात के लिए लाइसेंस की आवश्यकता है ?

विशिष्ट उत्पादों पर अलग नियंत्रण लागू होते हैं, और ऐसे मामलों में निर्यातकों को इन विशिष्ट उत्पादों के निर्यात से पहले DGFT से निर्यात लाइसेंस के रूप में एक परमिट प्राप्त करना होगा।

एक उदाहरण के रूप में, विशेष रसायनों, जीवों, सामग्रियों, उपकरणों और प्रौद्योगिकियों (SCOMET) की श्रेणी में आने वाली वस्तुओं को कुछ शर्तों की पूर्ति के अनुसार निर्यात किया जा सकता है।

SCOMET के तहत आने वाली वस्तुओं पर लगाई गई शर्तों के अनुसार, अन्य बातों के अलावा, SCOMET वस्तुओं का कोई भी निर्यात सामूहिक विनाश के हथियार और उनकी वितरण प्रणाली (गैरकानूनी गतिविधियों का निषेध) अधिनियम 2005 के अनुपालन में होना चाहिए।

वस्तुओं के निर्यात में लगी इकाइयों को विदेशी सरकार के प्रतिनिधियों या विदेशी निजी पार्टियों द्वारा साइट का दौरा करने से पहले केंद्र सरकार की पूर्व मंजूरी प्राप्त करने की आवश्यकता होती है, और आवेदन के साथ एंड-यूज सर्टिफिकेट होना चाहिए।

कुछ रसायनों को उन देशों को निर्यात किया जा सकता है जो रासायनिक हथियार सम्मेलन के पक्षकार हैं और DGFT को डिलीवरी के 30 दिनों के भीतर गंतव्य देश में शिपमेंट के साक्ष्य के बिल की एक प्रति की आवश्यकता हो सकती है।

SCOMET वस्तुओं के लिए नियंत्रण और आवेदन की प्रक्रिया विदेश व्यापार नीति और प्रक्रिया पुस्तिका (www.dgft.gov.in/ पर उपलब्ध) के तहत प्रदान की जाती है।

डब्ल्यूसीओ के मानकों के सुरक्षित ढांचे को लागू किया है ? क्या इसका कोई AEO प्रोग्राम या समान है ?

भारत ने WCO के सेफ फ्रेमवर्क ऑफ स्टैंडर्ड्स को लागू किया है, भारत सरकार ने 23 अगस्त 2011 (www.cbec.gov.in पर उपलब्ध) को भारत में अधिकृत आर्थिक ऑपरेटर (AEO) कार्यक्रम को अधिसूचित किया।

उक्त कार्यक्रम को परिपत्र संख्या 37/2011-सीमा शुल्क दिनांक 23 अगस्त 2011 के माध्यम से कार्यान्वित किया गया था, जिसमें AEO का दर्जा हासिल करने की प्रक्रिया निर्धारित है।

उक्त परिपत्र के तहत, कोई भी आयातक या निर्यातक AEO स्थिति के लिए आवेदन कर सकता है बशर्ते आवेदक आवेदन के वर्ष से पहले तीन साल के लिए वित्तीय रूप से विलायक रहा हो।

आवेदन के साथ एक प्रक्रिया मानचित्र, सुरक्षा योजना, साइट योजना और स्व-मूल्यांकन प्रपत्र होना चाहिए।

आवेदन के अनुसार, एक एईओ कार्यक्रम टीम सीमा शुल्क, केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सेवा कर कानूनों के साथ-साथ संबद्ध कानूनों का पालन सुनिश्चित करने के लिए आवेदक के पिछले चार वर्षों के अनुपालन के रिकॉर्ड की जांच करेगी।

इसके अलावा, आवेदक के पास वाणिज्यिक और परिवहन रिकॉर्ड के प्रबंधन की एक संतोषजनक प्रणाली, व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक तंत्र और कार्गो, वाहन, परिसर और कर्मियों की सुरक्षा के लिए एक उचित तंत्र होना चाहिए।

एक बार जब आवेदन को उपरोक्त आधारों पर वैध माना जाता है, तो आवेदन को आवेदक के परिसर में पूर्व-प्रमाणन लेखा परीक्षा आयोजित करने के लिए एईओ टीम को भेजा जाता है।

उपरोक्त आवश्यकताओं की संतुष्टि से AEO का दर्जा दिया जाता है।

निर्यात नियंत्रण के अधीन देशों की जानकारी कहाँ सूचीबद्ध होती है ?

कुछ देशों को निर्यात पर प्रतिबंध विदेश व्यापार नीति 2015-2020 (www.dgft.gov.in पर उपलब्ध) के तहत प्रदान किया गया है।

जिसे विदेश व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम 1992 की धारा 5 के तहत अधिसूचित किया गया है।

अधिसूचित देश हैं इराक (हथियारों और संबंधित सामग्री के निर्यात पर प्रतिबंध), इस्लामिक स्टेट इन इराक एंड द लेवेंट, जिसे दाएश (तेल और परिष्कृत तेल उत्पादों में व्यापार, मॉड्यूलर रिफाइनरी और संबंधित सामग्री के अलावा सांस्कृतिक वस्तुओं (सहित) के रूप में भी जाना जाता है।

डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया (सभी वस्तुओं, सामग्रियों, उपकरणों, वस्तुओं और प्रौद्योगिकी का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष निर्यात जो कोरिया के परमाणु-संबंधी में योगदान कर सकता है)

सोमालिया से चारकोल का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आयात प्रतिबंधित है।

निर्यात नियंत्रणों के उल्लंघन के लिए संभावित दंड क्या हैं ?

संभावित दंड में माल की जब्ती और जब्ती, निर्यातक पर जुर्माना और निर्यात लाइसेंस को निलंबित या रद्द करना शामिल है।

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