Fundamental Laws| भारत के मौलिक कानून।

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Basic Laws In India। भारतीय संविधान में चार अत्यंत महत्वपूर्ण कानून।

1 : सूचना का अधिकार (Right to Information) (Article 19 (1) (a))

सूचना का अधिकार (RTI) भारतीय संसद का एक अधिनियम है जो सूचना के अधिकार को भारत के नागरिकों के लिए एक मौलिक अधिकार बनाता है।

यह सूचना का अधिकार 15 जून, 2005 को संसद द्वारा पारित किया गया था और 12 अक्टूबर, 2005 को इसे पूरी तरह से लागू किया गया।

RTI अधिनियम के तहत, भारत का कोई भी नागरिक किसी भी सार्वजनिक प्राधिकरण (public authority) से जानकारी का अनुरोध कर सकता है और प्राधिकरण को जल्द से जल्द या तीस दिनों के भीतर जवाब देना पड़ता है।

किसी याचिकाकर्ता के जीवन और स्वतंत्रता से जुड़े मामले में प्राधिकरण को 48 घंटे के भीतर सूचना उपलब्ध करानी होती है।

2 : समानता का अधिकार (Right to Equality) (Article 14)

भारतीय संविधान का समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14) भारत के क्षेत्र में कानून के समक्ष समानता प्रदान करता है।

यह कानून किसी भारतीय नागरिक, निगमों और विदेशियों सहित भारत के क्षेत्र में रहने वाले किसी भी व्यक्ति और सभी पर लागू होता है।

अनुच्छेद 14 वर्गीकरण (classification) की अनुमति देता है, लेकिन तभी तक जब तक कि यह रिजनेबल हो।

3 : शिक्षा का अधिकार (Right to Education) (Article 21A)

शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE), भारत की संसद का एक अधिनियम है जिसे 4 अगस्त 2009 को बनाया गया था, यह कानून भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (A) के तहत भारत में 6 और 14 के बीच के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के महत्व के तौर-तरीकों का वर्णन करता है।

RTI 6 से 14 वर्ष की आयु के बीच शिक्षा की पहुंच को प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार बनाता है।

यह कानून कहता है, कि सभी निजी स्कूलों को बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करनी होंगी।

यह सभी गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों को प्रवेश के लिए कोई दान या कैपिटेशन शुल्क नहीं लेने और बच्चे या माता-पिता के साक्षात्कार (interview) का प्रावधान (provisions) नहीं करता है।

अधिनियम में यह भी प्रावधान है कि प्रारंभिक शिक्षा पूरी होने तक किसी भी बच्चे को रोका नहीं जाएगा, निष्कासित नहीं किया जाएगा या बोर्ड परीक्षा उत्तीर्ण करने की आवश्यकता नहीं होगी।

स्कूल छोड़ने वालों को समान उम्र के छात्रों के बराबर लाने के लिए विशेष प्रशिक्षण का भी प्रावधान है।

4 : जीवन का अधिकार (Right to Life) (under Article 21)

जीवन का अधिकार (अनुच्छेद 21) कहता है कि सरकार सहित किसी को भी आपके जीवन को समाप्त करने का अधिकार नहीं है।

इस कानून के तहत सरकार को आपकी सुरक्षा के लिए कानून बनाकर जीवन की सुरक्षा के लिए उचित उपाय करना अनिवार्य है।

जीवन का अधिकार के तहत यह भी प्रावधान है कि यदि आपकी जान जोखिम में है तो आपकी सुरक्षा के लिए सरकार द्वारा उचित कदम उठाए जाएं।

सार्वजनिक प्राधिकरणों (Public authorities) को आपके जीवन के अधिकार पर भी विचार करना चाहिए जब आप ऐसे निर्णय लेते हैं जो आपको खतरे में डाल सकते हैं या जो आपकी जीवन प्रत्याशा (life expectancy) को प्रभावित कर सकते हैं।

यदि आपके परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु राज्य के इन्वॉलवमेंट वाली परिस्थितियों (circumstances) में होती है, तो आपको जांच का अधिकार हो सकता है।

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