SEBI क्या है, और इसका कार्य क्या है ?

0
94

सेबी(SEBI-Securities and Exchange Board of India) अर्थात भारतीय प्रतिभूति और विनियम बोर्ड” की स्थापना वैसे तो 12 अप्रैल 1988 ईस्वी एक गैर संवैधानिक निकाय के रूप में हुआ था।

सेबी की स्थापना के बाद 30 जनवरी 1992 को भारत सरकार ने संसद में एक अध्यादेश के माध्यम से सेबी को एक संवैधानिक दर्जा दिया।

सेबी का मुख्यालय मुंबई में स्थित है। और सेबी के कुछ क्षेत्रीय कार्यालय भी हैं जो क्रमशः दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता और अहमदाबाद में स्थित है।

सेबी के संपूर्ण प्रबंधन में 6 सदस्य होते हैं, इसमें से एक सदस्य अध्यक्ष होता है,और अन्य पांच सदस्य के अलग कार्य होते हैं।

SEBI का अध्यक्ष

SEBI के अध्यक्ष का नामांकन भारत सरकार के द्वारा किया जाता है, इनका कार्यकाल 3 साल के लिए होता है या 65 वर्ष की उम्र तक होता है, इसमें से जो भी पहले हो।

बाकी चार सदस्यों को भी भारत सरकार ही चुनकर भेजती है, इनमें से 2 सदस्य वित्त मंत्रालय के जानकार और 2 कानून के जानकार होते हैं, शेष 1 सदस्य आरबीआई(RBI) के होते हैं, उनका चयन आरबीआई के अधिकारियों में से किया जाता है।

सेबी की स्थापना 1988 ईस्वी में हुई थी, तो सेबी की प्रारंभिक पूंजी 7.5 करोड़ थी, मतलब 7.5 करोड़ रुपए में सेबी की स्थापना हुई थी।

IDBI ICICI और IRCI इन तीन कंपनियों के द्वारा उस समय 7.5 करोड़ रुपए की राशि सेबी को सुरु करने के लिए दिया था।

SEBI का उद्देश्य क्या है ?

शेयर बाजार में निवेशकों के हितों की रक्षा करना

निवेशक शेयर बाजार में बहुत से कंपनियों के शेयर को खरीद और बिक्री किया करते हैं, ऐसे लोगों के साथ अगर कुछ गलत होता है तो निवेशक सेबी में अपना शिकायत दर्ज करा सकते हैं, सेबी का पहला काम है निवेशकों के हितों की रक्षा करना।

पूंजी बाजार को विकसित करना

पूंजी बाजार जो कंपनियों को कम समय या ज्यादा समय के लिए लोन प्रदान करता है, कंपनियां या औद्योगिक घराना पूंजी बाजार के माध्यम से लोन ले पाते हैं, तो ऐसे बाजार को विकसित करना भी सेबी का प्रमुख कार्य है।

शेयर बाजार के सभी अंगों को सेबी के ढांचे के अधीन लाना

शेयर बाजार के कई अंग होते हैं, जैसे की कंपनियां, निवेशक, ब्रोकर, दलाल, कंपनियों के निवेशक इन सभी को सेबी के आधीन लाना या (सेबी का जो नियम है उसके अधीन लाना) भी सेवी का एक प्रमुख कार्यों में से एक है।

ताकि पूरा का पूरा जो शेयर मार्केट है वह सेबी के बनाए हुए नियम से चल सके और किसी भी निवेशक के साथ धोखा ना हो।

शेयर बाजार में अनैतिक व्यापार पर रोक लगाना

शेयर बाजार में जो भी व्यापार अनैतिक हो, जो भी कंपनी गलत तरीके से व्यापार कर रहा हो, उस पर रोक लगाना और शेयर बाजार मैं अनैतिक तरीके से किसी भी कंपनी के शेयर को गलत तरीके से खरीद या बिक्री पर रोक लगाना भी सेबी के कार्यों में से है।

इनसाइडर ट्रेडिंग पर रोक लगाना

अब आप सोच रहे होंगे कि इनसाइडर ट्रेडिंग क्या होता है? तो दोस्तों इनसाइडर ट्रेडिंग का मतलब होता है अंतरंग व्यापार, मतलब कई बार ऐसा होता है कि कई कंपनियां जो अपना शेयर जारी कर रहा होता है, ऐसे में जो उस कंपनियों के अधिकारी होते हैं।

जिनको कि उस कंपनी के गुप्त व्यापार के बारे में पता हो या कुछ गुप्त जानकारी पता हो तो ऐसे में वे अधिकारी उस शेयर के माध्यम से ज्यादा फायदा कमा लेते हैं, ऐसे लोगों या कंपनियों की गतिविधियों को रोकना भी सेबी का एक प्रमुख कार्य है।

म्यूच्यूअल फंड सहित अन्य सामूहिक रत्नों का पंजीकरण करना

देश में बहुत सारी ऐसी स्कीम में लॉन्च होती है जिसमें बहुत सारे लोगों से एक साथ पैसा लेकर शेयर बाजार में लगाया जाता है।

ऐसे फंड का पंजीकरण करना तथा इस पर इनकी देखभाल करना भी सेबी का ही कार्य है।

SEBI में शिकायत कैसे करें ?

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) में अगर किसी कंपनी, के खिलाफ़ करनी हे तो पहले शिकायतों की जांच होगी जो कि वह SCORES प्लेटफॉर्म के ज़रिए की जाएंगी।

किसी लिस्टेड कंपनी, सेबी रजिस्टर्ड इंटरमीडियरी और मार्केट इंफ्रा इंस्टीट्यूशन के खिलाफ शिकायत है तो SCORES प्लेटफॉर्म से ही अर्ज़ी देनी होगी।

शिकायत के लिए रजिस्ट्रेशन कराने को निवेशक को नाम, पैन, पता और ई-मेल आईडी जैसी जानकारी मुहैया करानी होगी. इसे लागू करने का मकसद फिजूल में और नॉन सीरियस किस्म की आने वाली शिकायतों को कम करना है।

सेबी ने इसके लिए scores.gov.in नाम से अलग वेबसाइट बनाई है. इसके अलावा एक ई-मेल आईडी sebi@sebi.gov.in का विकल्प दिया गया है, जहां लोग शिकायतें भेज सकते है. सुविधा को और बेहतर बनाने के लिए SCORES का मोबाइल अप्लीकेशन भी लॉन्च किया गया है।

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here